अब तो चुनर भिगा लो

जाओ न इस तरह से
बरसात की ऋतु है,
रूठो न इस तरह से
बरसात की ऋतु है।
छोटी सी जिंदगी है
दूरी में मत बिताओ,
तन्हा रहो न ऐसे
बरसात की ऋतु है।
बाहर बरस रहे हैं,
सावन के मेघ रिमझिम
अपनी लगी बुझा लो
बरसात की ऋतु है।
कब तक रहोगे प्यासे
कब तक रहोगे सूखे
अब तो चुनर भिगा लो
बरसात की ऋतु है।
आओ ना पास आओ
ऐसे न दूर जाओ
श्रृंगार रस पिलाओ
बरसात की ऋतु है।
—— डॉ. सतीश पांडेय


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. Abhishek kumar - July 30, 2020, 11:03 pm

    प्रकृति का सुंदर वर्णन।

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 31, 2020, 7:25 am

    वाह

  3. Geeta kumari - August 2, 2020, 9:56 am

    श्रृंगार रस से सजी सुंदर रचना

Leave a Reply