आखिर कौन

बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन।
सबके हार गीले हैं आंसूओं से
मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 5, 2020, 8:04 pm

    हार के जगह हाथ पढ़ें

  2. Geeta kumari - August 5, 2020, 8:25 pm

    बहुत ख़ूब भाई जी।

  3. मोहन सिंह मानुष - August 5, 2020, 9:56 pm

    बहुत खूब

  4. Satish Pandey - August 5, 2020, 10:15 pm

    बहुत खूब

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