आधुनिक नारी

सशक्त है कमजोर नहीं,
पत्थर है केवल मोम नहीं।
विद्वती है बुद्धि हीन नहीं ,
बेड़ियों में अब वो जकड़ी नहीं।
आधुनिक है ,संकीर्ण नहीं,
संस्कृति संस्कारों से हीन नहीं।

हक पाना लड़ना जानती हैं
दिल की आवाज़ पहचानती है।
गुमराह करना आसान नहीं,
वह स्त्री है सामान नहीं।

शक्ति स्वरूपा , वो तेजोंमयी,
ममता मयी मगर दुखियारी नहीं।

सृष्टि का भार उठाए खड़ी ,
आंखों में पहले सा पानी नहीं।
हर क्षेत्र में अब वो आगे हैं ,
बीती हुई कोई कहानी नहीं।

निमिषा सिंघल

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17 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 15, 2019, 12:13 am

    अतिउत्तम रचना

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 15, 2019, 12:24 am

    वाह बहुत सुन्दर

  3. ashmita - September 15, 2019, 6:26 am

    Nice

  4. Antariksha Saha - September 15, 2019, 6:50 am

    Bahut khoob kaha

  5. DV - September 15, 2019, 9:27 am

    सशक्त अभिव्यक्ति भावपूर्ण रचना … आपको बधाई

  6. Mithilesh Rai - September 15, 2019, 11:41 am

    अच्छी रचना

  7. राम नरेशपुरवाला - September 15, 2019, 11:43 am

    Good

  8. Poonam singh - September 15, 2019, 12:37 pm

    Nice

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