इश्तेहार

इश्तेहार

खबरें खुलकर बेशुमार हर रोज़ इश्तेहार में डालते हैं,
दिलओ दिमाग के किस्से बेगुनाह बाज़ार में डालते हैं,

मार पीट गैंग रेप मडर मदर-फादर को भी लपेट कर,
आये दिन छत की मुँडेर पर कभी दरार में डालते हैं,

रुपये पैसे का क्या है आज नहीं कल ही दे देना यार,
ऐसा कहते हैं और बेसबर हर घर उधार में डालते हैं,

कुछ सोते हैं सिरहाने रख या चाय के साथ खंगालते हैं,
नसीब जिन्हें दो पल नहीं वो इसे गुलज़ार में डालते हैं।।

राही अंजाना

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7 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 10:29 pm

    Good

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 10:51 pm

    बहुत सुंदर

  3. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 11:40 pm

    Badiya h

  4. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 11:40 pm

    Gud job

  5. राम नरेशपुरवाला - September 12, 2019, 11:40 pm

    All the best

  6. देवेश साखरे 'देव' - September 13, 2019, 12:18 am

    वाह

  7. Poonam singh - September 13, 2019, 1:10 pm

    Nice

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