एक बेटी

एक घर में जन्म लिया तो
दूजे घर में ब्याही गई
एक घर मे पाली बड़ी हुई
दूजे घर की रानी बनी
एक घर में खेली कूदी तो
दूजे घर की रखवाली बनी
एक घर में शरारती रही तो
दूजे घर मे सयानी बनी
एक घर में पढ़ लिख पाई तो
दूजे घर में कमाई में लगी
एक घर में संस्कारी बनी तो
दूजे घर संस्कार देने में लगी
एक घर सब कुछ सीखा तो
दूजे घर जिम्मेदारी में लगी
एक घर में बचपन छोड़ा तो
दूसरे घर में ताउम्र रही
लेकिन वो एक नन्ही सी कली
दोनों घर का मान रही।।


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By Neha

8 Comments

  1. Praduman Amit - May 16, 2020, 8:46 pm

    आप की सोच बिल्कुल सही है। कविता अच्छी बनी है।

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 16, 2020, 9:45 pm

    सुंदर भाव चित्रण

  3. Priya Choudhary - May 16, 2020, 9:56 pm

    Bhut sunder 👏👏👏👏

  4. Antariksha Saha - May 16, 2020, 11:05 pm

    खूब

  5. Pragya Shukla - May 17, 2020, 12:29 pm

    👌

  6. Abhishek kumar - May 17, 2020, 12:37 pm

    Sahi

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 17, 2020, 5:20 pm

    वाह बहुत सुंदर

  8. Neha - May 18, 2020, 7:47 pm

    आप का धन्यवाद

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