चरित्रहीन

तड़पाने के अलावा और तुमने किया ही क्या है

बार बार मुझको चरित्रहीन कहा है

ये कैसी मोहब्बत है तुम्हारी ?

जिससे प्यार किया उसी को बाजारू कहा है

जो तुम्हारी मोहब्बत में सराबोर होकर

मीरा बन गई

उसको ही गमगीन किया है

तुम्हारे एक शक की खातिर

जो रिश्ता बहुत दूर तक जा सकता था,

उसकी नींव को ही कमजोर किया है।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. प्रेम में व्याकुल मन से उभरी शानदार कविता की प्रस्तुति बहुत ही सुन्दर है।

New Report

Close