चाँद

चाँद

आखिर कौन किसको देखने छत पर आया करता है,
चाँद इस ज़मीं पे या उस आसमान पे छाया करता है,

इंतज़ार कौन और किसका बड़ी बेसबरी से करता है,
पहले अंधेरा या रौशनी कौन किसको पाया करता है,

उम्र किसकी और कितनी बढ़ाने की चाहत में पागल,
है कौन जो रात दिन यूँहीं पलकें झपकाया करता है।।

राही अंजाना


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6 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - October 17, 2019, 5:20 pm

    वाह

  2. Poonam singh - October 17, 2019, 6:34 pm

    Nice

  3. nitu kandera - October 17, 2019, 10:36 pm

    Good

  4. NIMISHA SINGHAL - October 18, 2019, 4:49 am

    Kya khub

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