जिंदगी की चाहत

जहाँ हमें मिलना था वहीं मिलते
तो अच्छा था
जहाँ दूरियां न होती नजदीकीयां होती
वहीं मिलते तो अच्छा था
जहाँ फूल खिलते बहारें होती वहीं मिलते
तो अच्छा था
जहाँ सपने न होते हकीकत होती वही मिलते
तो अच्छा था
जहाँ वादे न होते भरोसा होता वही मिलते
तो अच्छा था
जहाँ दुशमनी न होती दोस्ती होती वहीं मिलते
तो आच्छा था
जहाँ वतन होता हिन्दुस्तान होता वहीं होते
तो अच्छा था
जहाँ वंदेमातरम् होता जहाँ राष्ट्रीय गान होता वहीं होते
तो अच्छा था ।

जयहिंद – रीता अरोरा


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1 Comment

  1. Kamal Tripathi - August 22, 2016, 3:53 pm

    heart touching ji

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