जिंदगी

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे,
उम्र ढल रही है ऐसे, मानो रेत हाथ से जैसे |

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे,

काश समय की इस रफ्तार को रोक पाता, समेट लेता पलों को आहिस्ता – आहिस्ता |
होश संभाला था जब, तब कुछ भी तो न था |
अब वास्ता है तुझसे तो वक्त की कमी सी लग रही है |

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे,

कुछ और खूबसूरत लम्हों को जीना बाकी है, कुछ और हसरतें अभी अधूरी हैं |
मुद्दे बहुत से हैं जिन्हें पूरा करना है, सफर के सिलसिले की रफ्तार अभी बाकी है |

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे,

कब से सपनों की चाह थी मन में, अभी – अभी तो फुर्सत के कुछ लम्हें मिले हैं,
जिम्मेदारियों के बोझ तले छटपटाहट थी कुछ ऐसी, उमर की बढ़ती गिनती में मानों जीना भूल से गए |

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे,

आज न जी सके गर वो लम्हा नापाक होगा, किसी के हौसलों का फिर से मखौल होगा |
आज पूछ रहा है वक्त दर्द – ए – दिल का हाल, अब तू ही बता जिंदगी कैसे उसे समझाऊं |

कैसे बताऊ जिंदगी कितना प्यार है तुझसे |

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