जो भी मिली

जो भी मिली

जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन
वो बेहया सब बेनक़ाब निकली

उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी
ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली

कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने
हर आरज़ू कमनसीब निकली

लगी मेहंदी वो हाथों की लकीरों को
आँखों से ख़ुशी बेहिसाब निकली

बन के आशिक़ भरी ज़ेबों को मिले
बाजारेग़म की अर्थी तन्हा निकली

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15 Comments

  1. Kumari Raushani - October 22, 2019, 4:23 am

    Nice

  2. NIMISHA SINGHAL - October 22, 2019, 11:15 am

    Nice

  3. देवेश साखरे 'देव' - October 22, 2019, 1:16 pm

    वाह

  4. Poonam singh - October 22, 2019, 3:05 pm

    Good

  5. Shyam Kunvar Bharti - October 22, 2019, 4:20 pm

    wah wah

  6. nitu kandera - October 24, 2019, 8:19 am

    Nice

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 25, 2019, 5:15 pm

    वाह बहुत सुंदर

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