ज्ञान की धारा

मोह माया के चक्कर में पड़कर,
ना करो ज्ञान की धारा को चौपट ।
सिखों और सिखाओ समाज को,
ना करो अपने ज्ञान से तुम कपट।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

Related Articles

कसम

कविता- कसम ——————- सौ बार कसम मैने खाई , फिर खुद ही उसको तोड़ा था, जब जब होती नादानी मुझसे, रब के आगे रोया था,…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close