ज्वाला

तन मन में मेरे ज्वाला धधक रहा,
सीने में मेरे बदले की भावना पनप रहा।
दूर हो जा मेरे नज़रों से पापी पाकिस्तानी,
तेरे दशहतगर्द का खेल मैं जान रहा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी


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6 Comments

  1. Anita Sharma - July 12, 2020, 9:31 pm

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 12, 2020, 10:29 pm

    Nice

  3. Abhishek kumar - July 12, 2020, 11:24 pm

    तन मन में मेरे ज्वाला धधक रही
    सीने में बदले की भावना पनप रही
    दूर हो जा मेरी नजरों से पापी पाकिस्तान
    तेरी दहशतगर्दी का खेल।

  4. Satish Pandey - July 13, 2020, 7:30 am

    👏👏

  5. Abhishek kumar - July 31, 2020, 1:23 am

    वीर रस का सुंदर प्रयोग

  6. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 4:06 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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