तक़दीर अपनी अपनी

हमें तो करोना ने लुटा, तक़दीर तो बहुत बलवान था।
एक दीप गलती से जली वहाँ, जहाँ आंधी तूफान था।।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. कविता के भाव बहुत अच्छे हैं । लेकिन बुरा मत मानियेगा, व्याकरणिक लिंगगत त्रुटियां हैं। जैसे तकदीर स्त्रीलिंग है उसे पुल्लिंग लिखा गया है और दीप पुल्लिंग है उसे स्त्रीलिंग लिखा गया है। शुद्ध रूप यह होगा-
    हमें तो कोरोना ने लूटा, तकदीर तो बहुत बलवान थी।
    एक दीप गलती से जला वहाँ, ,—–

New Report

Close