दिल की डूबें न कश्तियां

मेरी पुरनम कहानियां सुनकर।।
दिल की डूबें न कश्तियां सुनकर।।

तेरे चर्चे में फूलों की ख़ूशबू
पास आती हैं तितलियां सुनकर।।

दूल्हा बाज़ार से ख़रीदेंगे
क्या कहेंगी ये बेटियां सुनकर।।

वह मुझे याद कर रही होगी
लोग टोकेंगे हिचकियां सुनकर।।

सच भी उसको लगे बहाने सा
ख़त्म होंगी न दूरियां सुनकर।।


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2 Comments

  1. Pragya Shukla - August 2, 2020, 8:23 pm

    सुन्दर रचना

  2. Satish Pandey - August 2, 2020, 11:26 pm

    बहुत अच्छा लिखा है,

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