दूसरी मुलाक़ात

पहली मुलाक़ात थी अधूरी सी
दूजी को हम तरस रहे,
भूल ना रहे उन लम्हों को
बादल प्रेम के उमड़ रहे।।

भूखे- प्यासे हम भटक रहे
आंखों में उनकी तस्वीर लिए,,
उनका नाम, न ठिकाना जाने
फिर भी दिन उनके नाम किए ।।

दिल बहलाने को फिर एक दिन
यूं ही लाइब्रेरी में प्रवेश किए,
किताबें प्रेमचंद्र की वो ढूंढ़ रहे
हम अपने प्रेम को तलाश लिए।।

मुस्कराकर फिर कुछ बातें हुई
और एक – दूजे के नाम मिले,
ज्योंहि अगले मिलन के वादे हुए
मानो सूखे में बदल बरस पड़े।।

इस मिलन से ही फिर
कहानी में नई शुरुवात हुई,
दो दिलों की फिर यूं
ख़त्म दूसरी मुलाक़ात हुई।।

अनुज कौशिक
अगर आपने “पहली मुलाक़ात” नहीं पढ़ी तो मेरी प्रोफ़ाइल पर को भी पढ़ें।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

ना समझ संतान

कहानी-ना समझ संतान पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के…

Responses

New Report

Close