नैतिकता का संचार

सुबह सवेरे , आखोंदेखी घटना का है यह मंजर
अरूणोदय से पहले पहुँची,बच्चों की टोली चलकर
दौङ लगाते लगते थे, जैसे हो मंजिल पाने को तत्पर
स्वाबलम्बी बनने को आतुर, पर मर्यादा का नाम नहीं
अगल-बगल में कौन चल रहे, थोड़ा-सा भी ध्यान नहीं
अपशब्दो की झङी लगाते, कहाँ तनिक भी वे शर्माते
खो गये संस्कार कहाँ ,बची माचनवता आज कहाँ
क्या अपनी कथनी’ कुकरनी का उन्हें अंदाज कहाँ
एक यही आवाहन है, थोड़ा नौनिहालो पर ध्यान धरें
नैतिकता की शिक्षा का उनमें पहले संचार करें

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