पकड़ मत कान री मैया

पकड़ मत कान री मैया
कसम कुण्डल की खाऊँ मैं।
शिकायत कर रही झूठी
कहानी सच की बताऊँ मैं ।।
करूँ क्यों मैं भला चोरी
घर में हैं बहुत माखन।
नचाती नाच छछिया पे
चखूँ मैं स्वाद को माखन।।
चूमकर गाल को मेरे
करती लाल सब ग्वालन।
छुपाने को इसी खातिर
लगाती मूँह पे माखन।।
सताई सब मुझे कितना
तुझे कैसे बताऊँ मैं?
पकड़ मत कान री मैया
कसम कुण्डल की खाऊँ मैं।।
शिकायत कर रही झूठी
कहानी सच की बताऊँ मैं।।
चराए शौख से कन्हा
मिलकर ग्वाल संग गैया।
गरीबी में करे कोई
मजूरी हाथ से मैया।।
भरन को पेट मैं इनके
घर -घर खास की जाऊँ मैं।
‘विनयचंद ‘हो मगन मन- मन
लीला रास की गाऊँ मैं।।
पकड़ मत कान री मैया
कसम कुण्डल की खाऊँ मैं।
शिकायत कर रही झूठी
कहानी सच की बताऊँ मैं।।


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36 Comments

  1. Satish Pandey - August 7, 2020, 7:03 am

    बहुत सुन्दर, बहुत खूब, वाह

  2. BHARDWAJ TREKKER - August 7, 2020, 7:11 am

    Bahut sundar

  3. BHARDWAJ TREKKER - August 7, 2020, 7:12 am

    Gajab Ki poem h

  4. Dhruv kumar - August 7, 2020, 7:13 am

    Good

  5. Geeta kumari - August 7, 2020, 8:36 am

    बहुत सुंदर रचना

  6. Rajiv Mahali - August 7, 2020, 11:40 am

    बहुत सुन्दर

  7. Roshni Mishra - August 7, 2020, 1:48 pm

    Nice poetry on my kanhaiyaji

  8. Roshni Mishra - August 7, 2020, 1:52 pm

    About sunder pt. Ji

  9. Satish Pandey - August 7, 2020, 3:39 pm

    अतिसुन्दर, बहुत खूब, शास्त्री जी

  10. Ansu Kumar - August 7, 2020, 7:47 pm

    Nice poetry

  11. Mukesh Kumar - August 7, 2020, 7:51 pm

    Nice poem

  12. Rajiv Mahali - August 7, 2020, 11:17 pm

    बहुत खूब गुरुजी

  13. Anuj Jha - August 8, 2020, 4:44 pm

    अतिसुन्दर रचना।

  14. GAUTAM PATEL - August 8, 2020, 5:13 pm

    Bahut sundar

  15. BHARDWAJ TREKKER - August 8, 2020, 5:13 pm

    Very nice

  16. Krishna Kapila - August 10, 2020, 10:34 am

    Nyc kavita

  17. Ashish Bhardwaj - August 10, 2020, 11:12 am

    वाह पंडी जी वाह , क्या कमाल की कविता लिखी है , आपकी कविता को पढ़के ऐसा , मानो खुलता गुलाब दिल में बहार , सच में आपकी कविता अनोखी है मन करता है कि बार बार पढू , अंत पुनः धन्यवाद

  18. Khushi Bhardwaj - August 11, 2020, 4:14 pm

    Bahut hi sundar kavita h

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