बारी हैं!!!

बहुत सो लिए हम,, अब हमारे जागने की बारी हैं!!!
बहुत लूटा परिंदों ने, अब तड़पने की उनकी बारी हैं!!!
मन हमारे अकेले थे, सो वार कर गये वो हम पर,,
अब एकजुट होकर कुछ कर गुजरने की बारी हैं!!
28 राज्य और 3 देशों में बिखर कर रह गया इंडिया,,
अब इंडिया को अखंड साम्राज्य भारत बनाने की बारी हैं!!!

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पेशे से इंजीनियर,,, दिल से राईटर

8 Comments

  1. Panna - September 14, 2015, 7:11 pm

    aapki kavita hamesha aur likhne ko inspire karti he..bahut achi kavita

    • अंकित तिवारी - September 14, 2015, 8:05 pm

      Bade bhai… M kavita likhta hi Ni… Sirf tukbandi krta hu…

      Kavita to Wo h jo baaki aap sab likhte ho… Dhanyabaad dost.. Aapko acchi lgi

      • Panna - September 15, 2015, 12:04 pm

        ye aapka badappan he….jo aap aisa kah rahe ho

  2. Abhishek Tripathi - September 15, 2015, 9:51 pm

    behatareen … kya bat h.. 🙂

  3. Kapil Singh - November 8, 2015, 2:31 am

    motivational poem..:)

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:38 am

    वाह बहुत सुंदर

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