बेटियाँ

गृह-वाटिका सी होती हैं बेटियाँ,
घर आँगन को सजा देती हैं बेटियाँ |
जैसे बिना चाँद के आसमान सूना सा लगता है,
वैसे बिना बिटिया के घर कोना सा लगता है |
कौन कहता है ! बेटियाँ परायी होती है,
अरे वह तो सबके दुःख में दवाई सी होती है |
जब कभी दिल कुछ उदास सा होता है,
आखिरी साँस में बिटिया ही पास होती है |
बेटा-बेटी का कभी ना भेद करना,
कोमल कली के दिल में कभी ना ये खेद करना |
समाज के दर्पण में पराया धन हैं बिटियाँ,
लेकिन सच्चे इन्साफ से मन का कंचन हैं बेटियाँ |


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5 Comments

  1. Harish Joshi U.K - October 20, 2020, 3:05 pm

    bahut sundar rachna

  2. Geeta kumari - October 20, 2020, 3:28 pm

    बेटियों पर बहुत सुंदर कविता

  3. Satish Pandey - October 20, 2020, 4:08 pm

    बेटी पर सुन्दर रचना, सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2020, 11:25 pm

    अतिसुंदर

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