मनमोहन

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा,
ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा,

कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा,
कभी माँ जसोदा का छोटा सा लल्ला फोड़ मटकी से माखन खाने लगा,

कभी बन्धन में जो बंधा ही नहीं वो ओखल में बन्ध कर मुस्काने लगा,
कभी गोपियों संग श्री राधे के प्रेम में वो प्रेम से प्रेम निभाने लगा॥
राही (अंजाना)


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6 Comments

  1. Satish Pandey - August 7, 2020, 10:37 pm

    बहुत खूब

  2. Rishi Kumar - August 7, 2020, 10:57 pm

    Very nice 👌👌

  3. मोहन सिंह मानुष - August 8, 2020, 8:45 am

    बहुत सुंदर

  4. Rajiv Mahali - August 8, 2020, 10:11 am

    सुन्दर

  5. Vasundra singh - August 8, 2020, 11:29 am

    बहुत सुंदर

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 8, 2020, 9:44 pm

    अतिसुंदर

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