माँ मुझे फौज में भेज दे

माँ ! मुझे फौज में भेज दे।
ना बेटा ! अपने मन को जरा परहेज़ दे।।
बन जा बेटा आॅफिसर तू
राज करोगे जनताओं पर।
पब्लिक से नेताओं को भी
नाज रहेगा सेवाओं पर।।
साहेब बनकर जीना बेटा
तन मन को कर अंग्रेज दे।
ना बेटा अपने मन को जरा परहेज़ दे।।
अधिकारी और डाक्टर की सेवा
बेशक एक आफताब है माँ।
शिक्षक और नेता की सेवा
दुनिया में माहताब है माँ।।
पूत सपूत बनूँ मैं तेरा
मुझमें देशभक्ति लबरेज दे ।
माँ ! मुझे फौज में भेज दे।।
हठ करके तू माँ के दिल को
क्यों करता मजबूर है।
बाल हठ को दुनिया माने तो
तिरिया का हठ भी मशहूर है।।
कैसे कह दूँ बेटा मेरे
शहादत का तू दहेज दे।
ना बेटा ! अपने मन को जरा परहेज़ दे।।
बहुत कमाने पैसा माता
क्यों न जाऊँ विदेश में।
बाहर भीतर इज्ज़त होगी
क्या रखा स्वदेश में।।
सिर्फ कुछ सालों तक पत्थर का करेज दे।
ना बेटा अपने मन को जरा परहेज़ दे।।
तेरे पीछे क्या बनेगा
कौन करेगा मेरी राखी।
ऐसे हीं भारत माँ की
मुझे करने दो माँ राखी।।
ब्रह्माणी से क्षत्राणी बन
क्षत्रिय धर्म सहेज दे।
माँ ! मुझे फौज में भेज दे।।
बहुत करी परीक्षा तेरी
तेरे मन को पढ़कर।
मातृभूमि तो बेटा मेरे
माँ से भी है बढकर।।
“विनयचंद “तव दामन भर दूँ
दुआ-ए-परवेज से।
माताओं के माँ के खातिर
तन मन धन सब त्येज दे।
जा बेटा ! शरहद को तू सहेज दे।।
आफताब ःः सूरज
माहताब ःः चन्द्रमा
परवेज ःः विजय, शांति

Comments

12 responses to “माँ मुझे फौज में भेज दे”

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      Thanks

  1. Priya Choudhary

    बहुत बहुत बहुत सुंदर 🙏 जय मातृभूमि 🙏

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सहित आभार

  2. Deepak Sharma

    Very nice pandit vinay shastri ji

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