मैं निर्दोष हूँ मैया

मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला।
माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।।
दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है।
बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था तेरा नंदगोपाला।।
मैया – सारा दिन भाग रहा था मैं, गैया के पीछे पीछे।
फिर कैसे दोष दे रही है, ब्रज के समस्त ब्रजवाला ।।
झूठ के खेती करने आ पहुँचे है, समस्त ब्रजवासी।
कहना मान ले मैया, सच कहता है तेरा कन्हैया लल्ला।।


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10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 7, 2020, 9:09 pm

    अतिसुंदर

  2. Satish Pandey - August 7, 2020, 9:18 pm

    बहुत खूब

  3. Rajiv Mahali - August 7, 2020, 11:13 pm

    बहुत खूब

  4. Rishi Kumar - August 8, 2020, 6:43 am

    Good

  5. Vasundra singh - August 8, 2020, 11:29 am

    बहुत खूब

    • Praduman Amit - August 8, 2020, 7:50 pm

      आपकी समीक्षा ही, मेरी कलम मे शक्ति प्रदान करती है।

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