यक्षिणी की वेदना

यक्षिणी की वेदना के शूल:-
***********************
प्रश्न करेंगे
खुदा से अभी हम
क्यूं ना आया है चंदा
रोज देखें गली हम…

वो नादान है
थोड़ा दिल का है नाजुक
उसके रस्ते में गुलशन के
माफिक बिछे हम
उठाई कलम आज
एक अर्से के बाद
भूल बैठे थे उसको
जिसके आदी हुए हम
अनुराग से भरा फरवरी भी गया
क्यूं ना आया वो महबूब
जिसकी खातिर जिये हम…!!

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. यक्ष और यक्षिणी की
    पौराणिक कथा को
    कविता में पिरोकर
    जीवंत बनाया गया है
    और उसकी वेदना का
    मनोहप मार्मक वर्णन किया
    गया है
    बहुत खूब

  2. यक्षिणी की वेदना के शूल:-
    ***********************
    प्रश्न करेंगे
    खुदा से अभी हम
    क्यूं ना आया है चंदा
    रोज देखें गली हम…

    वो नादान है
    थोड़ा दिल का है नाजुक
    उसके रस्ते में गुलशन के
    माफिक बिछे हम
    उठाई कलम आज
    एक अर्से के बाद
    भूल बैठे थे उसको
    जिसके आदी हुए हम
    अनुराग से भरा फरवरी भी गया
    क्यूं ना आया वो महबूब
    जिसकी खातिर जिये हम…!!

    पूरी कविता इन्द्र देव की कुत्सित
    सोंच को दर्शाती है

New Report

Close