रमता योगी बहता पानी

JAY SHRI RAM

वृक्ष कबहुँ नाही फल भखे,
नदी ना संचे नीर
परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर ।।
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रमता योगी बहता पानी
कभी न रूकता सुनो रे भाई!
जिसको जिससे मिलना है
मिलकर ही रहेगा ।
जो मरा है अबतक
उसको एक दिन जीना ही पड़ेगा ।।
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रमता योगी बहता पानी
कभी न रूकता सुनो रे भाई! ।।1।।
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मन-माया लाख कोशिश कर ले,
नैनन को दबाने को
पर एक दिन आत्मा तो परमात्मा से मिलती ही है ।।
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रमता योगी बहता पानी
कभी न रूकता सुनो रे भाई! ।।2।।
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मोहान्ध कब-तक होओगे
कब-तक अंदर की आवाज को दबाओ
एक-ना-एक दिन खूद को जानोगे ही
उस-दिन खूद को पाओगे ।।
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रमता योगी बहता पानी
कभी न रूकता सुनो रे भाई! ।।3।।
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राम भक्त विकास कुमार

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