राज गोरखपुरी

राज गोरखपुरी

माँ के दिल में बसर नहीं छोड़ा.
बाकी कोई कसार नहीं छोड़ा.
घर की मजबूरियों ने भेजा है,
हमनें यूँ ही शहर नहीं छोड़ा.

—–डॉ.मुकेश कुमार (राज गोरखपुरी)
www.facebook.com/drmkraj2010


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3 Comments

  1. " पंकजोम " प्रेम "" - June 3, 2016, 1:59 pm

    Wahhhhhhh jnab….लाज़वाब

  2. Ajay Nawal - June 3, 2016, 5:35 pm

    nice one

  3. Kavi Manohar - June 3, 2016, 8:23 pm

    nice poem

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