रिस्ता

तेरा मेरा रिस्ता हैं क्या
अपनो सा किस्सा है क्या

क्यों इतना अपना सा लगता है तू
अनजान शहर में इतना अपना सा लगता है तू

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14 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - September 9, 2019, 6:06 pm

    बहुत खूब

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 6:38 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 6:41 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. Kanchan Dwivedi - September 9, 2019, 7:00 pm

    Nice

  5. ashmita - September 9, 2019, 11:02 pm

    Nice

  6. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 7:56 am

    Nice

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