लेटी थी

आज न सुन रही थी
न हीं पढ़ रही थी
वो केवल लेटी थी।
मेरी कविताओं को
पढ़कर खुश होनेवाली
बहू नहीं वो बेटी थी।।


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8 Comments

  1. Praduman Amit - August 5, 2020, 9:15 pm

    Wah Pandit jee kaya bat hai.

  2. मोहन सिंह मानुष - August 5, 2020, 9:30 pm

    वाह शास्त्री जी

  3. Satish Pandey - August 5, 2020, 10:13 pm

    बहुत खूब वाह

  4. Geeta kumari - August 5, 2020, 10:19 pm

    क्या हुआ था … कुछ मार्मिक सा लगा मुझे

  5. vivek singhal - August 5, 2020, 10:48 pm

    Yah kavita nhi dard hai dil se nikala hua.

  6. Rajiv Mahali - August 5, 2020, 11:13 pm

    मार्मिक भाव
    मार्मिक भाव

  7. Neha - August 6, 2020, 7:46 am

    👌🙏

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