शायरी

खुद से दूर क्यूँ तुम हो , बड़े मगरूर क्यूँ तुम हो

जो तेरा है नहीं उसके ,  नशे में चूर क्यूँ तुम हो

तेरी मायूसी दिखती है , घनी रातों के साये में

यूँ ही तकिये भिगोने पे , बड़े मजबूर क्यूँ तुम हो ।

@पंकज गर्ग


 

 


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3 Comments

  1. मासूम खिज़राबादी - March 22, 2017, 10:36 pm

    NICE ONE

  2. Abhishek kumar - November 26, 2019, 2:56 am

    Nice one

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