संदेशा

कड़कती बिजली की तरह चमचमाती हुई आती हो और सर्द हवा सी छू के निकल जाती हो |
इंतज़ार करते हुए तेरा मैं अक्सर ठिठुर जाता हूं संदेशा जो न आए तेरा तो व्याकुल हो जाता हूं |

नींद में होता हूं जब संदेशा आता है तेरा, चश्मा चढ़ा के तब हाथ रजाई से बाहर निकालता हूं |
कश्मकश सी बनी रहती है हर रोज सुबह – श्याम बस इसी बेक़रारी में, नींद पूरी न होने से मैं अक्सर थक जाता हूं |

अगली बार कब आए संदेशा तेरा बस बैचेन अभी से हो जाता हूं |
सांस लेने भर तक तुझे देख सकूं ? ये सोच के अधीर मन को पाता हूं |

खुद को खो चुका हूं मैं ख्यालों में तेरे, जी नहीं लगता अब किसी काम में मेरे |
पल भर के लिए ही सही पर तू पास हो, झूठा ही सही पर दिल में तेरे भी प्यार हो |


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3 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 7, 2020, 2:42 pm

    बहुत खूब

  2. Suman Kumari - December 7, 2020, 5:59 pm

    सुन्दर

  3. Pragya Shukla - December 8, 2020, 12:39 am

    वाह!
    इसे कहते हैं अति उत्तम रचना

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