सरहद

सौ दफा मैं हारा बेशक
जिद है फिर भी जीत की
सरहद नहीं होती कोई
परिंदों और प्रीत की।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज


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7 Comments

  1. Suman Kumari - November 28, 2020, 10:45 pm

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Pragya Shukla - November 28, 2020, 11:03 pm

    कहा गया है;
    गिरते हैं घुड़सवार ही मैदाने जंग में’
    जो कदम बढ़ायेगा वह गिरेगा और आगे भी बढ़ेगा
    सच ही कहा आपने परंदों और प्रीत की कोई सरहद नहीं होती
    वो तो हर सीमा को पार कर जाते हैं

    • Virendra sen - November 29, 2020, 2:03 pm

      अभिव्यक्ति पर खूबसूरत समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 29, 2020, 8:53 am

    सुंदर

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