हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |

हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |
चम चम माथे चमके चन्दा बहे जटा बीच गंगा धारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

मृग की छाला पहन के भोला ध्यान लगाए |
शमशान भस्म लगाके महाकाल कहलाए |
भांग धतूरा खा के भोला,करते है सदा गुजारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

महल अटारी छोड़ के शिव कैलाश धुनि रमाए |
भूत बैताल के संग मे ताता थइया नाच नचाए |
तीनों लोक के स्वामी भोला ,कर दो उद्धार हमारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

जटा जुट के धारी बाबा तुम हो डमरू धारी |
लटके गले भुजंगा कर शोभे त्रिशूल धारी |
दुखियो के दुख सारे ,करते तुम न्यारा वारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

पार्वती संग बिराजे गणेश कार्तिक गोद मे साजे |
बसहा नंदी शिव सवारी पूजे सब देव त्रिपुरारी |
डगमग डोले नैया लगा दो ,शिव अब किनारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Responses

  1. “चम चम माथे चमके चन्दा” “ताता थइया नाच नचाए” में सुन्दर आनुप्रासिक छटा है, आध्यात्मिक रस परिपूर्ण है, लोक के शब्दों का सुंदर प्रयोग है.

  2. अलंकार का सुंदर प्रयोग तथा ध्वन्यात्मक शब्दों का प्रयोग करके कविता को श्रृंगार से परिपूर्ण किया गया है

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