हृदय

हृदय
देह के जीवित रहने में
सहायक एक अंग मात्र नहीं है..!!

अपितु,
यह वो स्थान है
जहाँ प्रस्फुटित होते हैं
उन कोमल भावनाओं के अंकुर..,
जो बनाती हैं
एक साधारण मनुष्य को देवतुल्य..!!

ख़्याल रखिये अपने हृदय का
क्योंकि हृदय की शिथिलता,
वास्तव में शिथिलता है मानवता की..!!

~ अनु उर्मिल ‘अनुवाद’..✍️

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