काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए

काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए
घटा-ए जुल्फ मैखाना वलवला-ए रंगे चश्म शराब हो गए!?
-रमेश

Comments

One response to “काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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