मीठी सी बोली सुना दे

चल गुजिया ही खिला दे
मीठी सी बोली सुना दे
समझेंगे खेल ली होली,
पोत दे लालिमा रोली।
भूल जा सारी शर्म पुरानी
झिझक से काहे होली मनानी,
आज हमें है रस्म निभानी
चल गुजिया ही खिला दे
मीठी सी बोली सुना दे।
रंग से तर हैं लोग बिरज के
मन में लहर सी उठी है इधर से
हमको भी होली रंगा दे,
चल गुजिया ही खिला दे।

Comments

9 responses to “मीठी सी बोली सुना दे”

  1. बहुत मीठी कविता

  2. बहुत सुंदर रचना

  3. Geeta kumari

    चल गुजिया ही खिला दे
    मीठी सी बोली सुना दे
    समझेंगे खेल ली होली,
    पोत दे लालिमा रोली।
    _________ होली के त्यौहार पर गुजिया खाने की स्नेहिल सी मनुहार करती हुई कवि सतीश जी की बहुत खूबसूरत कविता बेहतर शिल्प, अतीव सुंदर भावाभिव्यक्ति

  4. बहुत खूब

  5. vikash kumar

    Jay ram jee ki

  6. बहुत ही सुंदर होली पर लिखी गई रचना चल गुझिया ही खिला दे

Leave a Reply

New Report

Close