सुधार निशदिन

बहुत ही है मुश्किल
औरों में सुधार लाना
बेहतर है खुद को ही
निश दिन सुधारते जाना

काम बहुत है सारे
हर दिन पांव पसारे
कुछ कर नाम कमाते
तो कोई कल पर टारे

दिन यूं ही गुजरते चले जाते
कुछ फुरसत कहां कभी पाते
कई आराम से नित न अघाते
कुछ उन्हें देख चिंतित हो जाते

बीमारी खड़ी मुंह बाए
चंचल को कम ही सताये
आलसी शिकार हुआ जाये
कारण कब समझ में आये

परिवार के ही दोनों अंग
इक आगे नित ही बढ़ाए
इक बिना कुछ किये ही
कर्मठ को नित ही सताये

स्वस्थ वो ही जो प्रयत्नशील
काम करे औरों से कराये
निकम्मा तो हर दिन जले
कटु बातों से पर को सताये

अच्छी सोंच से हर इंसान
आगे को सदा बढ़ता जाये
मधुर मुस्कान नित ही बिखेरे
पर के कष्टों को हरता जाये

Comments

5 responses to “सुधार निशदिन”

  1. Pratima chaudhary

    स्वस्थ वो ही जो प्रयत्नशील
    काम करे औरों से कराये
    निकम्मा तो हर दिन जले
    कटु बातों से पर को सताये

    अच्छी सोंच से हर इंसान
    आगे को सदा बढ़ता जाये
    मधुर मुस्कान नित ही बिखेरे
    पर के कष्टों को हरता जाये
    बहुत ही उम्दा पंक्तियां
    बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति 👏👏👏

  2. Geeta kumari

    “बहुत ही मुश्किल औरों में सुधार लाना, बेहतर है खुद को ही निश दिन सुधारते रहना ” वाह सर मनुष्य को प्रेरणा देती हुई बहुत सुंदर रचना।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

  3. अच्छी सोच से हर इंसान
    आगे को सदा बढ़ता जाये
    मधुर मुस्कान नित ही बिखेरे
    पर के कष्टों को हरता जाये।
    लाजवाब पंक्तियाँ हैं सर। आज की बेहतरीन कविताओं में आपकी कविता है। आपकी कविता में बनावटीपन बिल्कुल नहीं है। वाह वाह

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही सुंदर भाव अभिव्यक्ति
    वास्तव में अगर हम खुद की कमी सुधार लें तो जमाना अपने आप सुधर जाएगा

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