4 Liner#1

मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता |
पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता ||
चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर |
उतार देता थैला काँधे से , नौकरी खूंटी पर टांग देता ||

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

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Responses

  1. मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता |
    पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता ||
    कितनी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने

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