मौत एक सत्य

मेरे आशिक ,तूने मुझे पुकारा!
तो मैं जरूर आजाऊंगी,
किसी के पास देर से आती हूं ,
किसी के पास जल्दी से आती हूं,
तुमने ललकारा है तो क्षण में आ जाऊंगी ।
तू कर जिंदगी खराब अपनी,
कर नशा ,पी शराब ,कर अय्याशी!
तू खेल मेरे साथ, तुझे खूब खिलाऊंगी,
मैं मौत हूं !  तुझे सच में खा जाऊंगी।

हां वही हूं मैं जिससे सब,
थरथर कापते,
पास तो दूर की बात,
सब दूर से ही नाचते ।
प्यार जो किया है तूने मुझसे
अब कैसे ना तुझे अपनाऊंगी
मैं मौत हूं ! तुझे सच में खा जाऊंगी।

आ निचोड़ दू तेरे अहम् को,
मरोड़ दूं, तेरे वहम को,
क्यों तड़पता है मेरे लिए
आ तुझे हमेशा के लिए सुलाऊंगी
मैं मौत हूं, तुझे सच में खा जाऊंगी।

                            ———  मोहन सिंह मानुष

Comments

12 responses to “मौत एक सत्य”

  1. Praduman Amit

    बहुत सुंदर।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार 🙏

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह क्या बात है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      ,🙏🙏🙏😊

  3. Anjali Gupta Avatar

    बहुत खूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    ,🙏🙏

  5. Satish Pandey

    अत्यंत सरल शब्दों में सच्चाई को प्रकट किया गया है, शिल्पगत विशेषता में काव्यानुरूप लय स्थापित हुई है, बहुत खूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार व धन्यवाद। ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें 🙏 सर!

    2. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद, नेहा जी

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