14 Comments

  1. अपनों को खुश रखने की चाह में ,हम अपनी खुशी और अभिलाषाओं को भूल जाते हैं। यही बात कविता में बहुत ही बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत की गई है।

  2. दूसरों को खुश करते करते स्वयं को भूल जाना….हम महिलाओं की इस आदत का सुंदर चित्रण किया है…. बहुत ख़ूबसूरत

  3. वास्तविकता है यह कि अपनी जिम्मेदारी निभाते निभाते पता ही नहीं चलता है कि कब जिंदगी निकल गयी। साधारण शब्दों में बड़ी बात कही गयी है। ‘मेरा पती,मेरे बच्चे,मेरा घर,मेरे लोग’ सुन्दर आनुप्रासिक छटा बिखेरी गयी है। तत्सम, तद्भसव, अरबी-फारसी, और अंग्रेजी शब्दों का तालमेल देखने लायक है।

    1. बहुत धन्यवाद आपका.वैसे मराठी ज्यादा लिखती हुं.लेकीन आप जैसे जानकार यहाँ हैं,तो सिखने मे आनंद आयेगा.thanks again satish ji.

  4. Grihasti ko ek Mahila kis Prakar chalati hai aur taken cut Narayan ka Samna karna padta hai yah Ek Mahila hi behtarin tarike se jaan sakti hai aur aapane ruk Nahin Kavita ke Madhyam se bahut hi Sundar Bhagwan Ko vyakt Kiya Hai

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