मुक्तक
ये दोस्त ये रास्तें ही मेरी मंजिल है, मेरे दिल का जज़्बात ही मेरी साहिल है। सोच लेता हूं कभी अपना गुजरा हुआ कल, मेरा…
ये दोस्त ये रास्तें ही मेरी मंजिल है, मेरे दिल का जज़्बात ही मेरी साहिल है। सोच लेता हूं कभी अपना गुजरा हुआ कल, मेरा…
मन की चिंता है हितकारी, कभी ना भागो मेरे भाई । सोच विचार ही लाता परिणाम, इसे देख ना घबराओ भाई ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सोच विचार की दोस्ती देता ताउम्र साथ, मित्र के सोच को समझ कर ही बढ़ाओ हाथ। दोस्ती का बंधन टिकता विश्वास के साथ, धुर्त चोर…
राह भले हो लम्बी अपनी, सोच विचार करके है चलना। देखकर टिमटिमाते हुए तारें, प्रेम की बंशी बजाते है रहना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
चिंता हो या चिंतन करो सोच समझकर, ना पगलाओ तुम ना पागल करो मुझे। दिग्गज के चक्कर में ना करो जीवन नर्क, शान से जीयो…
जीवन एक अलौकिक धारा, सदैब पानी संग बहते रहना। लुटाकर अपने अनोम विचार, सोच समझ कर बढ़ते रहना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
काला चश्मा पहनकर चलते सतरंगी चाल में, खुद से खुद बातें करते फंसते देखो जाल में। बात के जंजीरों में जकड़ पीसते देखो जात में,…
हकिकत को पहचाने का तजुर्बा है, झूठ को ठुकराने का हौसला है । सोच विचार से निकलता है मार्ग, धूर्त मक्कार सदैव फिसलता है।। ✍महेश…
खोटे सिक्के को यूं ही सरेआम जलील मत करो यारों, कभी खोटा सिक्का भी बादशाह हुआ करता था, बस वक्त वक्त की बात होती है,…
त्याग बलिदान करके जो धर्म का प्रसार किये, भटके मुसाफिर को बुध्द ने राह दिखाये । शत् शत् नमन है बुध्द के स्वर्णिम विचार का,…
धन दौलत की चाह में, काट रहा गला इंसान राह में। अपना पराया का कर ना पाया भेद, हवस की खोपड़ी भरने के चक्कर में।।…
हाथ बढ़े है देखो सकड़ौ, धन के पोटली के चाह में। एक दुसरे को धकेल कर, भटक रहें है देखो कितने राह में।। ✍महेश गुप्ता…
सत्य कि राह दिखाते बुध्द, बिछड़ों को मिलाते बुध्द । परेशान आत्मा को गले लगाकर, दुःख दर्द को सारे हर लेते बुध्द।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जिस जिसका हैं आत्मा शुद्ध, उसी में बसते हैं गौतम बुद्ध । चालबाज फरेबी भटक रहें, ईश्वर के निगाह में खटक रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पैसे की चाह में टूट रहें है रिश्तें, पैसे के राह में बेगाने हुए फरिश्ते। पैसे की ताकत से संबंध बिगड़ते, पैसे के धधकते राह…
जग में मिलते विभिन्न विचार के प्राणी, शुध्द आत्मा विचार को समझना हैं भारी, ना जाने कितने रंग के हैं चोले ओढ़े, देख दुनिया करतुतों…
न्याय बिकता है अन्ययाय बिकता है, मेरे भारत देश में स्वाभिमान बिकता है। कानून बिकता है कानून ब्यवस्था बिकता है, नेता जी का इमान सुबह…
अर्थतंत्र पर लोकतंत्र को हावी कर दो यार । जातिवाद को छोड सदा मानवता का बनाओ संसार ।। झूठ फरेब छल दम्भ से होगा माया…
वक्त की नुमाइश मंदि हम क्या करेंगे, वक्त तेरे पीछे – पीछे हम भी चल पड़ेगें। वक्त जरा तमिज सिखा देना मुझे भी, वक्त तेरे…
कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट…
बिछड़ने से जरा पहले तुम्हें कुछ याद है हमदम तुम आये थे मुझसे मिलने बिछड़ने के इरादे से
जिसे हम भूल जाते हैं खुदा भी रूठ जाता है चैन उसको नहीं मिलता लोग भी मुँह चिढ़ाते हैं
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से अतृप्त है अभी कुछ और समेटना है मुझे सफ़र के लिए
ये सन्नाटा चुभता है मेरे दिल को तुम्हारा बोलते रहना ही अच्छा लगता है
मेरे ह्रदय में स्पंदन होता है हे राम! अब हर दम होंठो पर बस नाम तुम्हारा होता है
करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं दीद जिस दिन नहीं होती तेरी चांद छत पर नहीं आता…
उम्मीदों का दीया जलाकर इस आशा में बैठे हैं कल सूरज खुशियाँ लाएगा चाँद सजाकर बैठे हैं
मेरी ज़िन्दगी की अधूरी कहानी है तू मेरी आँखों में मौजूद पानी है तू मेरे जीवन का मुन्तजिर है मेरी ख्वाइशों की पैमाइश है तू
रात की दीवार पर लिखा ख्वाबों का संदेश ए चंदा पहुंचा देना ‘अपने’ रहते परदेस…..
इंतज़ार झिलमिलाता रहा रातभर आंखों में! तुम नहीं तुम्हारा पैग़ाम आया ‘आज न सही, कल की बात रही’। चलो मान लेते हैं; एक और झूठ…
लोग कहते हैं कि मैं बड़ा कमाल लिखती हूँ मैं उसका ही दिया हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ
रात भी खत्म हो गई बस तेरा जिक्र बाकी है तूने तो मुझे मार डाला पर मेरी साँस बाकी है
ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर बोतल में बंद कर दिए चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें सारे ख्वाब छुपाये बैठे…
खामोशी भी एक सिलसिला -ए-गुफ्तगू ही है खैर छोड़ो तुम्हारे बस की बात नहीं…….
मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है जिसने दिल से जाना चाहा उसे, उसे रब का वास्ता…
इंतिहा खत्म हुआ मेरी बेसब्री का मुलाकात भी हुई उनसे मगर कोई बात ना हुई वह आकर चले गए मगर मेरे होंठ सिले के सिले…
बैर भाव से ऊपर उठकर आओ रंग लगाते हैं, होली है त्यौहार मिलन का मिलकर इसे मनाते हैं।
हम चिलमन से ही झांकते रह गए वो रंगने हमें आये थे पर पड़ोसन को रंग गए
एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए….
किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।
हम रंग नहीं खेलते कुछ बात हो गई हम राज़ नहीं खोलते कुछ बात हो गई मिली जब नज़र उनसे फिर नज़र ना हटी हम…
नज़र तो आओ कभी नज़र को नजरों से मिलाओ कभी सपने तो बहुत दिखाये तुमने, एक सपना सच कर जाओ कभी।
रात पर छाई खुमारी बौने सपने हो गये उम्र बीती तेरी आरजू में सपने सपने हो गए
मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं
एहसास प्यार ❣️ मोहब्बत का एहसास रूह ❣️ तमन्ना का एहसास 💞खूबसूरत💞 ख्याल का एहसास 🌹मन🌹 के जज्बात का एहसास 🌕धूप🌕 के छांव का एहसास…
भाल लेकर तैनात रहो, भारत देश के जवानों तुम, जीभ खिंच कर काट लो, जो देश के खिलाफ बात करें। महेश गुप्ता जौनपुरी
अपने स्वेद से सींच कर बोई थी मोहब्बत की फ़सल शक के एक झोंके ने सब बर्बाद कर दिया।
क्या अपने जज़्बात बयाँ करना भी गुनाह है जब वक्त होता है तो कह सुन लेते हैं हम यारों से।
चलो तुम जीत जाओ हमें हराकर यही खुशी है तुम्हारी तो हम तुमसे हार कर भी जीत जायेगें ।
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