इंतज़ार

इंतज़ार झिलमिलाता रहा रातभर आंखों में! तुम नहीं तुम्हारा पैग़ाम आया ‘आज न सही, कल की बात रही’। चलो मान लेते हैं; एक और झूठ…

रब का वास्ता

मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है जिसने दिल से जाना चाहा उसे, उसे रब का वास्ता…

तौबा

किसी को किसी की खबर नहीं है ए खुदा! ये कैसा ज़माना आया इन्सान तो है मगर इन्सानो में इंसानियत नहीं है तौबा ।

हौसले

मुड़ कर ना देखेंगे दोबारा रोज़ यही फैसला किया करते हैं पर जब तुम्हारी याद है तो हौसले टूट जाते हैं

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