मां की गोदी में खेलकर बड़ा हुआ,
मां के क़दमों को चूमकर खड़ा हुआ।
दुध पीकर मां का आंचल का मुझे प्यार मिला,
मां के छत्रछाया में ज्ञान पाकर मैं बड़ा हुआ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां की गोदी में खेलकर बड़ा हुआ,
मां के क़दमों को चूमकर खड़ा हुआ।
दुध पीकर मां का आंचल का मुझे प्यार मिला,
मां के छत्रछाया में ज्ञान पाकर मैं बड़ा हुआ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
फूल खिले हैं डाली डाली
भक्तों के हाथ में माला है।
तुम तक कैसे पहुँचें भगवन
मन्दिर में लटक रहा वस ताला है।।
कोरोना भगाने को हम सब
घर में बन्द रहे दिन पचास।
कोरोना तो भागा नहीं अब
घर भी बन गया एक वनवास ।।
कर्ण ने कवच कुण्डल दान किया
दानवीर कहलाने के लिए।
दधिचि ऋषि अश्थि तक त्यागे
आखिर क्या पाने के लिए।
रंगमंच पर हर किरदार
अपना एक महत्व रखता है।
गूंगा बनकर चार्ली चेप्लिन
दुनिया को खूब हँसता है।।
जो रोने भी ना दे
बन के आँख का आँसू बरसे
वो प्यारी माँ होती है
क्या लिखूं तुझ पर ?
तू खुद शब्दों की माया है,
खुद ना आ सका विधाता
इसलिए तुझे भिजवाया है।
Happy mother’s day
जब से सावन मेरी जिंदगी में
बहार बनके आया
तब से हम कविताओं को
अपने डायरी में जगह नहीं देते।
दिन अरतालिस बन्द रहे सब
घर के भीतर काम काज सब छोड़ व्यापार।
फिर भी कोरोना जालिम बन
हो गया बन्धु साठ हजार।।
कुछ खट्टी कुछ मीठी
बातों को
सुनने और सुनाने को
जी करता है
मेरा जब भी
तेरी आँचल में
आ जाता हूँ।
तू जननी है
जन्मभूमि है
तेरी गोद में
आकर मैया
सुख जन्नत
का पा जाता हूँ।।
देखते देखते
हम बदनाम हो गए
देखते देखते हम सिरफिरे और नाकाम हो गए,
कल कहते थे हम जिंदगी है उनकी
आज उनके लिए हम दास्तां-ए शाम हो गए।
सोच विचार करते करते,
जीवन की नैया डुब गयी।
बैठ कर गलतीयां गिनते गिनते,
बटोही आधी उम्र बीत गयी ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
राह में चलते चले मनु,
खुद को खुद से ढ़ो रहें।
सोच विचार करके मनु,
अपने आप को खो रहें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खोल यादों की पोटली सोच विचार कर रहें,
मानव अपने कर्मों पर गहन विचार कर रहें।
कैसी ये मुफलिसी है छायी मेरे चेहरे पर,
अपने आप को ढुंढ कर अपने आप में ही खोए रहें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें,
यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें।
कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन करें,
जिंदगी के क्रुध्द पल का आ बटोही हनन करें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ये दोस्त ये रास्तें ही मेरी मंजिल है,
मेरे दिल का जज़्बात ही मेरी साहिल है।
सोच लेता हूं कभी अपना गुजरा हुआ कल,
मेरा दुःख दर्द मेरा किस्मत ही जाहिल है।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मन की चिंता है हितकारी,
कभी ना भागो मेरे भाई ।
सोच विचार ही लाता परिणाम,
इसे देख ना घबराओ भाई ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सोच विचार की दोस्ती देता ताउम्र साथ,
मित्र के सोच को समझ कर ही बढ़ाओ हाथ।
दोस्ती का बंधन टिकता विश्वास के साथ,
धुर्त चोर उचक्कों से माफ करो मुझे नाथ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
राह भले हो लम्बी अपनी,
सोच विचार करके है चलना।
देखकर टिमटिमाते हुए तारें,
प्रेम की बंशी बजाते है रहना।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
चिंता हो या चिंतन करो सोच समझकर,
ना पगलाओ तुम ना पागल करो मुझे।
दिग्गज के चक्कर में ना करो जीवन नर्क,
शान से जीयो शान से रहो मेरे तुम बात को बुझो।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जीवन एक अलौकिक धारा,
सदैब पानी संग बहते रहना।
लुटाकर अपने अनोम विचार,
सोच समझ कर बढ़ते रहना।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
काला चश्मा पहनकर चलते सतरंगी चाल में,
खुद से खुद बातें करते फंसते देखो जाल में।
बात के जंजीरों में जकड़ पीसते देखो जात में,
अपने सर का बोझ उठाये फिरते अंधेरी रात में।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हकिकत को पहचाने का तजुर्बा है,
झूठ को ठुकराने का हौसला है ।
सोच विचार से निकलता है मार्ग,
धूर्त मक्कार सदैव फिसलता है।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खोटे सिक्के को यूं ही सरेआम जलील मत करो यारों,
कभी खोटा सिक्का भी बादशाह हुआ करता था,
बस वक्त वक्त की बात होती है,
समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है,
महेश गुप्ता जौनपुरी
त्याग बलिदान करके जो धर्म का प्रसार किये,
भटके मुसाफिर को बुध्द ने राह दिखाये ।
शत् शत् नमन है बुध्द के स्वर्णिम विचार का,
महल अटारी के ऐसों आराम के त्याग का ।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
धन दौलत की चाह में,
काट रहा गला इंसान राह में।
अपना पराया का कर ना पाया भेद,
हवस की खोपड़ी भरने के चक्कर में।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हाथ बढ़े है देखो सकड़ौ,
धन के पोटली के चाह में।
एक दुसरे को धकेल कर,
भटक रहें है देखो कितने राह में।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्य कि राह दिखाते बुध्द,
बिछड़ों को मिलाते बुध्द ।
परेशान आत्मा को गले लगाकर,
दुःख दर्द को सारे हर लेते बुध्द।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जिस जिसका हैं आत्मा शुद्ध,
उसी में बसते हैं गौतम बुद्ध ।
चालबाज फरेबी भटक रहें,
ईश्वर के निगाह में खटक रहें।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पैसे की चाह में टूट रहें है रिश्तें,
पैसे के राह में बेगाने हुए फरिश्ते।
पैसे की ताकत से संबंध बिगड़ते,
पैसे के धधकते राह पर चलो आहिस्ते।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जग में मिलते विभिन्न विचार के प्राणी,
शुध्द आत्मा विचार को समझना हैं भारी,
ना जाने कितने रंग के हैं चोले ओढ़े,
देख दुनिया करतुतों को दंग हुयी है सारी।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
न्याय बिकता है अन्ययाय बिकता है,
मेरे भारत देश में स्वाभिमान बिकता है।
कानून बिकता है कानून ब्यवस्था बिकता है,
नेता जी का इमान सुबह शाम बिकता है।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
अर्थतंत्र पर लोकतंत्र को हावी कर दो यार ।
जातिवाद को छोड सदा मानवता का बनाओ संसार ।।
झूठ फरेब छल दम्भ से होगा माया का विस्तार ।
दया धर्म समता से बनेगा न्याय का सुनहरा संसार ।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
वक्त की नुमाइश मंदि हम क्या करेंगे,
वक्त तेरे पीछे – पीछे हम भी चल पड़ेगें।
वक्त जरा तमिज सिखा देना मुझे भी,
वक्त तेरे आने पर सरीखे हम भी सीख लेंगे।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
कभी इन राहों पर भी आया करो…
क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कानून के रक्षक
भी अब
भक्षक हो गए ,
करें भरोसा
आखिर
किस पर?
खाकी वर्दी
भी
गुलाम बन
हुक्म बजाती
सफेदपोश की।
काले कोट के जेब
बड़े हो गए,
करें भरोसा
आखिर
किस पर?
लुच्चे,
लम्पट,
चोर,
आतंकी
खुल्ला
घूम रहे हैं
देखो।
हिंसक भीर
भेरिये की चहुदिश
हो गई
ज़िन्दगी
मुश्किल खरगोश की।
साधु
संत
सन्यासी
को चोर समझ
अनाचार
कर रहा समाज।
मुर्खता और
गलतफहमी के
सब शिकार
हो गए,
करें भरोसा
आखिर
किस पर?
बिछड़ने से जरा पहले
तुम्हें कुछ याद है हमदम
तुम आये थे मुझसे मिलने
बिछड़ने के इरादे से
जिसे हम भूल जाते हैं
खुदा भी रूठ जाता है
चैन उसको नहीं मिलता
लोग भी मुँह चिढ़ाते हैं
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से अतृप्त है
अभी कुछ और समेटना है मुझे सफ़र के लिए
ये सन्नाटा चुभता है मेरे दिल को
तुम्हारा बोलते रहना ही अच्छा लगता है
मेरे ह्रदय में स्पंदन होता है
हे राम! अब हर दम होंठो पर
बस नाम तुम्हारा होता है
करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ
तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं
दीद जिस दिन नहीं होती तेरी
चांद छत पर नहीं आता
आईना जितनी दफ़ा देखूँ
तेरा ही चेहरा नज़र आता
उम्मीदों का दीया जलाकर
इस आशा में बैठे हैं
कल सूरज खुशियाँ लाएगा
चाँद सजाकर बैठे हैं
मेरी ज़िन्दगी की अधूरी कहानी है तू
मेरी आँखों में मौजूद पानी है तू
मेरे जीवन का मुन्तजिर है
मेरी ख्वाइशों की पैमाइश है तू
रात की दीवार पर लिखा ख्वाबों का संदेश
ए चंदा पहुंचा देना ‘अपने’ रहते परदेस…..
इंतज़ार झिलमिलाता रहा
रातभर आंखों में!
तुम नहीं
तुम्हारा पैग़ाम आया
‘आज न सही, कल की बात रही’।
चलो मान लेते हैं;
एक और झूठ
तुम्हारे नाम पर जी लेते हैं
लोग कहते हैं कि मैं
बड़ा कमाल लिखती हूँ
मैं उसका ही दिया
हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ
रात भी खत्म हो गई
बस तेरा जिक्र बाकी है
तूने तो मुझे मार डाला
पर मेरी साँस बाकी है
ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर
बोतल में बंद कर दिए
चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं
रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें
सारे ख्वाब छुपाये बैठे हैं
खामोशी भी एक सिलसिला -ए-गुफ्तगू ही है
खैर छोड़ो तुम्हारे बस की बात नहीं…….
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