स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कल ही लिपटे थे दामन से क्यूँ आज तिरंगा ओढ़ चले? दो कदम चले थे साथ अभी क्यों आज मुझे तुम छोड़ चले? अब प्रेम गगरिया को अपनी मैं आँखों […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कल ही लिपटे थे दामन से क्यूँ आज तिरंगा ओढ़ चले? दो कदम चले थे साथ अभी क्यों आज मुझे तुम छोड़ चले? अब प्रेम गगरिया को अपनी मैं आँखों […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कभी लहू तो कभी उनका कफ़न बन जाऊ स्वतंत्र दीप से जगमगाता हुआ चमन बन जाऊ ए आजादी तू घटा बनके बरसना और में तेरा भीगता हुआ गगन बन जाऊ […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- दृढ़ निश्चय लेके निकले मुसीबत को निकाला जड़ से उखाड़ ये देश भक्त हुए दुनिया में विख्यात जब लहू से लिखा इन वीरो ने भारत माँ का नाम करने आये […]
स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- कृतज्ञ देश है उन वीरों का जिसने लहू बहाया अपना देश की खातिर तन मन धन सब कुछ है लुटाया अपना बलिदान दिया है कितनी मां ने कितनी बहनों ने […]
न खोजो मेरा इतिहास तुम, तुम्हारे लिए तो आज हूँ मैं। न खंगालो मेरे बीते हुए पल बस तुम्हारा, तुम्हारे प्यार का मोहताज हूँ मैं। बीती हुई खोजोगे तो कमियां मिलेंगी, आज पर ही जियो […]
सुबह का पहला ख़्वाब हो तुम जैसे कोई मेहकता गुलाब हो तुम भरी दोपहरी का यौवन, और शाम का ढलता शबाब हो तुम कभी मेहक तो कभी मेहखाना हो जैसे रात में घूंट घूंट चढ़ता […]
अध ढकें तन को छिपाए दुनिया के बाजार में गुमसुम सी बैठी एक नारी लोग आते हैं और रुक कर आगे बढ़ जाते हैं हो रहा हो यहां कोई तमाशा जैसे किसी मनचले की नजरें […]
ना जाने क्या है इन आँखों में कुछ ठहर-सा गया है.. रोती हैं तेरी यादों में पर वक्त गुजर-सा गया है..
दिल का मचलना बार बार हिचकी पे हिचकी आना। बता “राहत ” किधर जाना इधर जाना या उधर जाना।।
खत्म हुआ खेल मुहब्बत का। गिर गया पर्दा मेरे अंजुमन का।।
मैं बीता कल हूँ भले ही तुम्हारे लिए , पर किस के लिए तो आज हूँ मैं। तुम्हारी नजर में बेवफा हूँ। पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं। स्वयं ठुकरा के मेरी बाहों को, […]
वक्त ने किससे क्या क्या न करवाया है कभी रोते को हंसाया है तो कभी हँसते को रुलाया है कभी ख़ुशी से दामन भर देता है तो कभी ग़मों को तकदीर में शामिल कर देता […]
आजकल बड़े पैतरे आजमाने लगे हो तुम! मुझसे दूर जाने के… इतनी समझ आई कहाँ से तुम में? पहले तो तुम बहुत नादान हुआ करते थे… अच्छा तो अब ये भी मेरी संगत का असर […]
आज बहुत दिनों बाद आई हूँ तुम्हारे दिल की गलियों में.. सफर करने को जरा संभाल कर रखना अपनी धड़कनों को मुझे देखकर कहीं मचल ना पड़ें… यूं नजरों से देखने की कोशिश ना करो […]
कविता- वजह ——————- तन मे तुम हो, मन मे तुम हो दिल में तुमको रखता हूं| चाहे जितना मुझे भुलाओ, निस दिन तुम पर मरता हूं| जीने की वजह मेरी हो मरने की वजह मेरी […]
जन मन ने उत्साह सजाकर भारतमाता के चरणों में आज पुष्प अर्पित करके गुंजायमान नारों से कर राष्ट्रप्रेम की लहर जगाई, जन-मन मे उमंग भर आई। राष्ट्रपर्व पर सारा भारत दिखा एकजुट रहा एकजुट जिसे […]
दिल और कलम, कलम कह रही है आज ,कि मोहब्बत पे किताब लिखूं। दिल चाहता है मगर कि,मै गम बेशुमार लिखूं।। कुछ यूं है दलील- ए- कलम ,मोहबब्त लिखे बीते हैं बरस। दिल कहे कर […]
हे भारत!मातृभूमि! तेरे पर्वों को लाख नमन उन संतानों को लाख नमन जिन संतानों ने जान गंवा हमको सौंपा है चैन -अमन।
हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या हो घाटी गलवान खड़े मिलेंगे […]
कविता- डर था ——————— पागल था पागल हूँ पागल ही रहुंगा, यह तुम्हारी सोच है| तेरी नजरो मे , सब कुछ था| बस इंसान नहीं जानवर था| इंसान बनने कि कोशिश में, तेरे मुख से […]
ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है ये दर्द अब और ना सह पायेंगे बात जिस भाषा में समझते हो तुम बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे तुमने सोचा भी कैसे, हम […]
“जंग ये खत्म हो लाखों की दुआ कहती है.. ज़िन्दगी खुद इसे साँसों की जुआ कहती है । सब तो देखा है सिसकती हुई इन आहों ने.. फिर भी ये बेबसी ‘सब कैसे हुआ’ कहती […]
आज की दिवा बड़ी गर्व की है, इस दिवा में भीष्म प्रण लेते हैं हम, आजादी के लिए जो शहीद हुए, उनका बलिदान ब्यर्थ न जाने देगें हम , सीमा पार तो सेना निपट लेगा, […]
*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]
*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]
आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने समाज जब संवेदनहीन हो जाये तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने तिरंगे के […]
जब भी कोई उम्मीद कभी, मेरे सर पर हाथ फिराती है .. माँ तेरी बहुत याद आती है.. माँ तेरी बहुत याद आती है.. कोई सतरंगी चादर गर, तेरी चूनर सी लहराती है.. माँ तेरी […]
हिंदुस्तान की रक्षा करना कर्तव्य है हिंदुस्तानी का हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई है एक ही दरिया पानी का । जब-जब है हिंसा की कटार से किसी धर्म का रक्त बहेगा रक्त बहा है किस धर्म […]
जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]
आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]
आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]
जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]
कविता- चादर —————— रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ| सर सर टप टप आंसू बहता , रिम झिम सावन जस होता|| मिल न सके फिर , फिर से कदम, छोड़ गयी […]
नमन मेरा उन परवानों को, आजादी के दीवानों को, कुछ जाने से ,कुछ अनजाने से, क्रान्ति के मतवालों को, खेल गए जो मौत से, निडर रहे बेखौफ से, शहादत व बलिदानों को, नमन मेरा ,नमन […]
नींद में सपने में हम जाने कहाँ खो जाते हैं जो कभी देखा नहीं हो उस जगह हो आते हैं। घमंड में गुरुर में हम इस कदर गिर जाते हैं गरीब भी इंसान है इस […]
35: *स्वविजय करो * ****************** स्वयं दीप बनों । स्वयं नियमन करो ।। सभ्य, ज्ञानी, जागरूक हो तुम । खुद,खुद का संचलन करो ।। परस्पर सुरक्षित दूरी का,ध्यान रखते हुए । खुद सतर्क रहो ,नियमों […]
राष्ट्र पर्व पर सभी शत-शत नमन करें, देश के शहीदों को शत-शत नमन करें। तोड़ने जंजीर दासता की चल पड़े, सर कटा दिया झुके नहीं, नमन करें। राष्ट्र पर्व पर…. बिखरे हुए, टूटे हुए भारत […]
बहुत प्यारा था वह जहान लोग जहां मिलजुल कर करते थे काम जब कोई बगल से गुजरता कहता जाता भैया राम राम। जहां लोग एक दूसरे का दर्द बांटते हो जहां बुजुर्गों की बातें बेटे […]
मैं किसी फटी डायरी के पन्नों सा, जो हवा में उड़ रहे है इधर- उधर, मगर अफसोस ! पढ़ने वाला कोई नहीं। ……..मोहन सिंह मानुष
एक शब्द ने मुझे हिला डाला , अच्छी चल रही थी जिंदगी, मगर रुला डाला। ये शब्द बड़ा मीठा सा, तीखा सा, बड़ा परेशान करे ,नींदों को हराम करें, शोहरत से बदनाम हुए, और वजूद […]
आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात […]
शब्दों का पिटारा तो हम रखकर बैठें हैं लेकिन वो शब्द नहीं, जो हाल-ए-दिल बयां कर सके
🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]
🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]
बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता था […]
“इसी तरह से हे महासत्य मेरा साथ तुम देना, इसी मिट्टी का हो जाने का वर हे नाथ तुम देना । जगत के दृश्य में कर्ता भले कोई भी हो लेकिन, मेरे काँधे, मेरे सर […]
ये बेबस सी दिखती है जो, ये उस निर्दोष की पत्नी है, जिसे संतों के संग कत्ल किया, ये उस खामोश की पत्नी है । क्या मिला है ऐसा कर तुमको, क्या हासिल कर ले […]
समन्दर भी ना जाने, उसमें कितनी नदियां समाती हैं। ये तो नदिया ही जाने, उसको कितनी सौतन मिल जाती हैं। मीठे – मीठे पानी की नदियां, समन्दर की ओर बह जाती हैं। फिर , मीठा […]
मत निकाल अपने दिल से मुझे, मैं तो वक्त हूँ, गुज़र जाऊँगा इस भरे शहर में कोई आशना नही, ये जगह भी गई तो किधर जाऊँगा ? मायने : आशना – परिचित
लफ़्ज अक्सर लवों पर ही ठहर जाते है जमाने के खौफ़ है कि क्या कहेगा सुनकर
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