इशारो इशारो में गुफ्तगू करते हो, कभी दिल का भी हाल सुनाते तो। कभी खयालों में खुशबू से महक उठते हो, आखिर तुम्हारी रजा क्या है बताते तो। सैकड़ों राही मिले सफर – ए- जिंदगानी […]

गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर […]

जुबां की बात मत करना.. उसे आंखों में छुपा रखना… वो चिरागे आतिश है सुलग उठोगे। इश्क कोई दर्द भरी शमा नहीं! जो सिसकती रहे रात भर और खत्म हो जाए। इश्क कोई बांसुरी नहीं! […]

जुबां की बात मत करना.. उसे आंखों में छुपा रखना… वो चिरागे आतिश है सुलग उठोगे। इश्क कोई दर्द भरी शमा नहीं! जो सिसकती रहे रात भर और खत्म हो जाए। इश्क कोई बांसुरी नहीं! […]

गुजर कभी मुफ़लिसों की बस्ती में। मिल कर हर खुशी मनाते मस्ती में। जरूरतें पूरी होने से बस मतलब इन्हें, क्या रखा दिखावे की महंगी सस्ती में। परवाह किसे, किनारा मिले ना मिले, कश्ती पानी […]

दीए का इंतजाम तो हर नुक्कड़ हर मकान पर है, पर मेरे दिल में उजाला बस तेरे आने से होगा। जगमगा उठा इस रात देखो जहां सारा इन्सान की दीवाली तो इन्सानियत के जागने से […]

मिले काँटे या मुझको फूल। पर हो मेरे अनुकूल।। इतना सुख न देना स्वामी जो मुझ में अभिमान जगाए। इतना दुख न देना मालिक जो मुझको पल पल तड़पाए।। सुख दुःख में ये विनयचंद कभी […]

बुझती, बंद होती यादों की मोमबत्तियां, दे जाती है याद आज भी मधुरिमा। कुछ शब्द कोंधते हैं आवाज़ बनके कहकहे हवाओंमें गूंजते हैं साज बनके। निमिषा सिंघल

तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे! जोगन बन आई कान्हा रे। तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे। १. लाख विनती कर हारी, राधा तेरी दीवानी, तेरे दरस की प्यासी मैं हूं तेरी कहानी, कान्हा मुझ में समा […]

दीपों की माला को देखो कैसे सज्जित होती हैं। चारों तरफ उजाला कारके बस यही प्रज्वलित होती हैं । खोकर राग द्वेष को ये चारों तरफ सुगंधित होती हैं। दीपो की माला को देखो कैसे […]

हथेली से रेत की तरह पल पल सरकती जिंदगी, फिर भी जाने क्यों आग की तरह भड़कती जिंदगी। मुकाम मौत ही तो है इसका, लाख पहरा दो उसी ओर बढ़ती जिंदगी। पर खुद को सदा […]

जीवन बहुत कठिन है गरीबो का आगे बढ़ना मुश्किल है शरीफों का सीखना जरुरी है जीवन के सलीखो का डटकर खंडन करती हूँ बेईमान तरीको का. सिर्फ मांगने से हक मिलता कभी ना पैसे के […]

मैं तेरी सूरत का दीवाना हूँ कबसे। मैं तेरी चाहत का अफ़साना हूँ कबसे। अंज़ामें-बेरुख़ी से बिख़री है ज़िन्दग़ी- मैं तेरे ज़ुल्मों का नज़राना हूँ कबसे। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

खेलने लगी है जिंदगी मुझसे आज कल कुछ ज्यादा, चल मैं भी चाल चलती हूं ,पर कर तू एक वादा, तू अपनी चाल ना रोकना, मैं खुद का हौसला पहचानूंगी, तू यू ही पग पग […]

चाहता दिल सदा से मुझे, इन पर्वतों की श्रृंखलाओं में, इन नदियों की चंचलता में, इन झडनो की घुंघरू में, इन देवदारो की घनेरी छाव मे, इन वादियों मैं कहीं खो जाऊं, आती है मिट्टी […]

काश। मैं टूटे दिलों को जोड़ पाता आँधियों की राह को मैं मोड़ पाता। पोंछ पाता अश्क जो दृग से बहे वक्त की जो मार बेबस हो सहे। चाहता ले लूँ जलन जो हैं जले […]

गुज़रा ज़माना याद दिलाता है ख़त। अब बीता ज़माना कहलाता है ख़त। रूठे को मनाना, हाले-दिल बताना, अपनों को अपना बनाता है ख़त। ना हुई कभी मुलाक़ात ना कोई बात, दो अंजानो को करीब लाता […]

चलो साथी एक खेल खेलते हैं, मोहब्बत के तार पर जिंदगी का राग छेड़ते हैं। एक सितार ही तो है जिंदगी, शुरुआत करते हैं करके वंदगी, उलझी तार तो सुलझाएंगे, सरगम से नया सुर बनाएंगे, […]

कर ले राम भजन रे भाई। राम भजन की महती महिमा वेदों ने है गाई । तड़े अजामिल गणिका तड़ गई तड़ा सदनकसाई।। ध्रुव प्रह्लाद विभीषण सबरी सतानंद की माई। राम राम कह जरठ जटायु […]

दोस्ती ऐसा, जैसे खुदा की परस्तिश। दोस्ती में है, बेइंतिहा प्यार की कशिश। दोस्तों की दोस्ती पे है कुर्बान ये जान, हमें अज़ीज़ हैं, अपने सभी मोनिस। देवेश साखरे ‘देव’ परस्तिश- पूजा, मोनिस- दोस्त

आओ मनाएं हम ऐसी दीवाली, जिसमे न हो प्रदूषण का नामोनिशा, तब होगी हमारी सच्ची दिवाली, खुशी ऐसी किस काम की, जिससे हम सारे हो परेशा, आओ मनाए हम ऐसी दीवाली, जिसमें न हो प्रदूषण […]

न जाने तुम कहां खो गए, भरी दुनिया में जाने कहां खो गए, हम यहां तेरी याद में भटकते रह गए, हर शख्स में ढूंढा मैंने तेरा चेहरा, मिले न तुम बस तुम तन्हा कर […]

देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावली अन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने “दिवाली” जो कभी थी […]

न रात को नींद न दिन को चैन है, तेरी वेरूखी से दिल बडा बेचैन है, जब तक चाहा दिल से खेला तुमने, भर गया जी तो पलटकर देखा भी नहीं तुमने, तेरी बेवफाई बहुत […]

हर पल आँखों में रहती तेरी तस्वीर है। माने या ना माने, तू ही मेरी तकदीर है। गर बन जाओ तुम, मेरी सदा के लिये, ये सुहाने पल हो सकती मेरी जागीर है। देवेश साखरे […]

मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी […]

जिसे देख देख कर मैंने पुरी ग़ज़ल लिख डाली, वहीं रूबाई में औरों का नाम ढुंढता है। मेरी हर रात गुजरी इंतजार में झरोखे पर, वो है कि मिलने को कोई शाम ढुंढता है। चांद […]

कवि बनना आसान नहीं, हृदय के उद्वेगो को माला में पिरोना कोई खेल नहीं। झुरमुटों के जंगल से जज्बातों को एक-एक करके बाहर लाना कोई खेल नहीं। जिंदगी खुली किताब ना बन जाए संभल कर […]

जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन वो बेहया सब बेनक़ाब निकली उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने हर आरज़ू कमनसीब निकली लगी मेहंदी वो हाथों […]

जिनके अल्फाज़ आईने के तरह साफ होते हैं, जमाने की हवा उनके खिलाफ होते हैं। औरों के काम को वहीं आग का नाम देते, जिनके आवाजों में अक्सर उबलते भाप होते हैं। जंगल का नाग […]

हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती हूँ तुमसे यही कामना रक्षा उसकी सदा करना मुश्किलों से हो जब भी उसका सामना हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती […]

मेरे महबूब के हुस्न की जो बात है। चौदहवीं के चांद तेरी क्या बिसात है।। चांद भी देख गश खाएगा, मेरे महबूब को देख शर्माएगा। मेरे महबूब से हंसीन ये रात है। चौदहवीं के चांद […]

तुम्हारे अंदर जो मैं है, वह तुम्हें पीछे धकेलता है। तुम्हारे अंदर जो पीड़ा है, वह तुम्हें दया सिखाती है। तुम्हारे अंदर जो प्यार है, वह तुम्हें भावुक बनाता है। तुम्हारे अंदर जो एक जानवर […]

••• अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं। उन घरोंदों को फिर सजाना है।। क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको। फिर उस उम्मीद को […]

अपने गली का होने ना दिया, खुद के घर चैन से सोने ना दिया। जाते-जाते मुड़ा इस कदर, मुस्कान मेरा ले गया, फिर भी मुझे रोने ना दिया। अपना कह कर अपना बना ना सका, […]

जिंदगी आज फिर एक सवाल पूछती है! अपने साथ है या साथ छोड़ गए?? झूठे आडंबरो के लिए नाता तोड़ गए!! तुम तो उनके अपने थे?? फिर परायों के लिए, तुम्हें आज अकेला क्यों छोड़ […]

हे घनश्याम गोपाल मुरारी। मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। दीनबंधु करुणा के सागर। भगतबच्छल प्रभु आरतहर।। जगतपति जगतारनहारी, मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।। तेरी कृपा बरस रही निश-दिन। बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।। दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’, मेरी […]

चिर परिचित जब कोई आ टकराता ख्वाब में, फिजा का हर रंग तब घुल जाता शवाब में। स्वप्न सुनहरा पलकों पर घर कर लेता, रात छोटी पर जाती ख्यालों के ठहराव में। वक्त का फासला […]

उम्र भर पिता ने जो, पाई पाई रखा था सहेज। बिटिया के ब्याह में, आज वह दे दिया दहेज।। ब्याह में लिए कर्ज का चुका रहे अभी किस्तें। थमा दिया जाता मांगों के फिर नए […]

सांवले सलोने चेहरे पर चमकती सफेद दंत पंक्ति, खूबसूरत उन्हें बनाती है। खेतों में काम करती महिलाएं, हंसी -ठिठोली करते -करते काम निपटाती हैं। नपी तुली देह, चंचल निगाहें, साड़ी में लिपटी वे सशक्त महिलाएं, […]

हिन्दी कविता – नाम हिंदुस्तान हमारा | नाम हिंदुस्तान हमारा होगा काम तमाम तुम्हारा | रहो अपनी औकात बुरा होगा अनजाम तुम्हारा | हर तरफ घिर चुके निगाहों सबकी गिर चुके तुम | टकराए जो […]

हिन्दी गजल- बचना भगवान भी जरूरी | हिन्द जमीं राम भी जरूरी और रहीम भी जरूरी | बना रहे सबमे भाईचारा दिलो यकीन भी जरूरी | दो कदम तुम बढ़ो और दो कदम हम भी […]

किसी को इश्क का नशा, किसी को रश्क का नशा। किसी को शय का नशा, किसी को मय का नशा। किसी को दौलत का नशा, किसी को शोहरत का नशा। किसी को इबादत का नशा, […]

प्रकृति ने हमें क्या-क्या ना दिया! यह कल-कल करती नदियां, यह स्वच्छ धरा यह नीलगगन। यह सुंदर चांद, तारे ,सूरज, लंबे , हरे भरे हैं वृक्ष यहां। फलों से लदे बागान यहां। ऊंचे ऊंचे पर्वत […]

आओ दिवाली ऐसी मनाए , थोड़ी खुशियां हम भी लुटाए। जो तरसे इन खुशियों को इन, आओ दिवाली उन सब की मनाए। थोड़ी मिठाई हम भी खाएं, थोड़ी उनमें बांट के आए। हंसते चेहरे देखोगे […]

नेताजी लाल पीले हैं, मुंह में है आग, ताशे उनकी ढीले हैं। विपक्षी दलों पर आरोपों की कंकरिया फिकवा रहे, वादों पर वादों की फुलझड़ीया जला रहे। एक दूसरे का कच्चा चिट्ठा जनता को सुना […]