श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न मीरा ही कहलाई न राधा सी तुझको भायी श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न रहती कोई कसक मन में जो मैं सोचती सिर्फ अपनी भलाई […]
श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न मीरा ही कहलाई न राधा सी तुझको भायी श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न रहती कोई कसक मन में जो मैं सोचती सिर्फ अपनी भलाई […]
कस्तूरी अपनी नाभि में रख मृग, सुगंध के पीछे भागती सारे वन में। काम, मोह, माया के पीछे भाग, व्यर्थ समय ना गंवाओ जीवन में। धैर्य, शील, शांति पाना कठिन नहीं, खोज सकते हैं स्वयं […]
दिल का दीप जलाओ सजनी आई मधुर दिवाली रे। प्रेम भाव का तेल भरो और सेवा सत्य की बाती। संकल्प ज्योति से प्रज्ज्वलित कर जगमग कर सुखरासी।। वीर सपूत को अर्पण करो अबकी मधुर दिवाली […]
जो हल जोते फसल उगाये उसे उसकी किमत नहीं मिलती जो मजदुर उत्पाद बनाय उसे उसकी कीमत नहीं मिलती भूख और लाचारी का ऐसा आलम है अब जान सस्ती है रोटी नहीं जात और धर्म […]
दीपावली है खुशियों का त्योहार पर यहां सब इसे प्रदूषण का जरिया बना बैठे हैं, यहां सभी बहरे बन बैठे हैं, लगता है कानों में तेल और रुई दे बैठे हैं, फिक्र नहीं कोई जिए […]
हम अपने घरों का का कोना कोना चमकाते है ताकि अच्छे से मना सके दीपावली का दिन और कितना कूड़ा फैला देते है दीपावली के दिन ही दिन. छिड़कते है गंगाजल वातावरण स्वच्छ बनाने को […]
याद करना कभी तीस साल पहले क़ी सर्दियाँ बिस्तर से ना निकलने की कभी होती थी मार्जियाँ. याद करना कभी तीस साल पहले की सर्दियाँ स्कूल से छुट्टी मरने के लिए खूब लगाते थे अर्जियाँ. […]
सुनहरी धूप सी काया, मोगरेकी कली के समान मनमोहिनी माया। सुलक्षणा चपला चंचला सी, मोहक अस्त्रों से बांधती छाया। आंखें खोली तो सिर्फ तुम थी बंद आंखों में भी तुम्हारी माया। दीवाना में बन गया […]
रूप अद्वितीय बिखराती हो, जब सामने तुम आती हो। काले घने केश लहराती, आंखों से जादू सा चलाती। एक हंसी उन्मुक्त तुम्हारी, बेचैनी दिल में दे जाती। कौन हो तुम? क्या ख्वाब कोई? या मीठा […]
त्योहारों का भी कुछ मतलब, समझो तो नहीं कुछ भी गफलत। समृद्धि उन्नति का द्योतक, राग द्वेष और मेल का ज्योतक। त्योहार बिना जीवन यह नीरस, नीरस जीवन में भरने कुछ रस, त्योहार हमारे आते […]
एक प्यारा संसार सजाएं, हंसी खुशी का शहर बसाए। गम जहां से ओझल हो जाए, खुशियां दामन भर भर आए। प्रगति उन्नति का हो जो द्योतक, हरी भरी धरती नील गगन तक। दुख जहां ढूंढे […]
अभी उम्र ही क्या थी, वक्त ने बांधे घुंघरू पांव में। अभी बचपन पूरा बीता नहीं, मां की आंचल के छांव में। हुई अवसर मौकापरस्तों की, चंद रुपयों के अभाव में। मजबूरियां पहुंचाईं कोठे पर, […]
औरत तेरी कहानी जैसे बहता पानी महानता तेरी जगमानी वेग है तू जबरदस्त तूफानी. पर्वतों मे तू नदी वेगवाहिनी मैदानों मे तू स्थिर विरानी खेतो मे तू अन्न गर्भ धारणी महान होकर भी तू सदाचारणी. […]
एक दीप जवानों के नाम, जो सरहद पर खड़े हैं। एक दीप शहीदों के नाम, जो हमारे लिए लड़े हैं। इनके हिस्से कोई पर्व, खुशियाँ या परिवार कहाँ, देश की सुरक्षा इनके लिए सब खुशियों […]
तू मुस्कुरा दे, मैं कुर्बान हो जाऊं, तेरी एक खुशी के लिए निलाम हो जाऊं। बयां करना ही फकत मोहब्बत नहीं, ख़ामोश लबो से मैं तेरे नाम हो जाऊ। वैसे तो हमारा घर इक दूजे […]
पिंजर बनना तय हम सबका, क्यों लालच में अंधा रें! प्रेम दया से जी ले रे बंदे जग दो दिन का फेरा रे। जाएगा जब इस जग से तू चार जनों का कंधा रेे। क्या […]
पिंजर बनना तय हम सबका, क्यों लालच में अंधा रें! प्रेम दया से जी ले रे बंदे जग दो दिन का फेरा रे। जाएगा जब इस जग से तू चार जनों का कंधा रेे। क्या […]
फिर से आ जाओ मेरे पास मेरी हर धड़कन तेरी राह तकती है सुन्न पड़ गया है दिमाग़ बस इसमें सोच तेरी ही बसती है कानो मे जाने के बाद तेरे हंसी तेरी ही गूंजती […]
दिल में जो सैलाब है आंखों से निकलता क्यू हैं? तुमको देखे बिना ये दिल तड़फता क्यू है? तुम तो इस दिल के रौनक – ए- बहार हो यह बात समझते नहीं तो मुस्काते क्यू […]
इशारो इशारो में गुफ्तगू करते हो, कभी दिल का भी हाल सुनाते तो। कभी खयालों में खुशबू से महक उठते हो, आखिर तुम्हारी रजा क्या है बताते तो। सैकड़ों राही मिले सफर – ए- जिंदगानी […]
गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर […]
जुबां की बात मत करना.. उसे आंखों में छुपा रखना… वो चिरागे आतिश है सुलग उठोगे। इश्क कोई दर्द भरी शमा नहीं! जो सिसकती रहे रात भर और खत्म हो जाए। इश्क कोई बांसुरी नहीं! […]
जुबां की बात मत करना.. उसे आंखों में छुपा रखना… वो चिरागे आतिश है सुलग उठोगे। इश्क कोई दर्द भरी शमा नहीं! जो सिसकती रहे रात भर और खत्म हो जाए। इश्क कोई बांसुरी नहीं! […]
गुजर कभी मुफ़लिसों की बस्ती में। मिल कर हर खुशी मनाते मस्ती में। जरूरतें पूरी होने से बस मतलब इन्हें, क्या रखा दिखावे की महंगी सस्ती में। परवाह किसे, किनारा मिले ना मिले, कश्ती पानी […]
दीए का इंतजाम तो हर नुक्कड़ हर मकान पर है, पर मेरे दिल में उजाला बस तेरे आने से होगा। जगमगा उठा इस रात देखो जहां सारा इन्सान की दीवाली तो इन्सानियत के जागने से […]
मिले काँटे या मुझको फूल। पर हो मेरे अनुकूल।। इतना सुख न देना स्वामी जो मुझ में अभिमान जगाए। इतना दुख न देना मालिक जो मुझको पल पल तड़पाए।। सुख दुःख में ये विनयचंद कभी […]
बुझती, बंद होती यादों की मोमबत्तियां, दे जाती है याद आज भी मधुरिमा। कुछ शब्द कोंधते हैं आवाज़ बनके कहकहे हवाओंमें गूंजते हैं साज बनके। निमिषा सिंघल
तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे! जोगन बन आई कान्हा रे। तोसे प्रीत लगाई कान्हा रे। १. लाख विनती कर हारी, राधा तेरी दीवानी, तेरे दरस की प्यासी मैं हूं तेरी कहानी, कान्हा मुझ में समा […]
दीपों की माला को देखो कैसे सज्जित होती हैं। चारों तरफ उजाला कारके बस यही प्रज्वलित होती हैं । खोकर राग द्वेष को ये चारों तरफ सुगंधित होती हैं। दीपो की माला को देखो कैसे […]
जख्म हरा रहता हरदम नहीं। वक़्त से बड़ा कोई मरहम नहीं। जिस्मानी घाव तो भर जाते हैं, मिटता दिल पर लगा जख्म नहीं। देवेश साखरे ‘देव’
हथेली से रेत की तरह पल पल सरकती जिंदगी, फिर भी जाने क्यों आग की तरह भड़कती जिंदगी। मुकाम मौत ही तो है इसका, लाख पहरा दो उसी ओर बढ़ती जिंदगी। पर खुद को सदा […]
रौशनी की किरण आई नजर, कभी तो आएगी नई सहर । कभी तो गम का अंधेरा हटेगा, कभी तो आएगी खुशियों की लहर । स्याह रात का पर्दा, कभी तो हटाएगी नई सहर । कभी […]
जीवन बहुत कठिन है गरीबो का आगे बढ़ना मुश्किल है शरीफों का सीखना जरुरी है जीवन के सलीखो का डटकर खंडन करती हूँ बेईमान तरीको का. सिर्फ मांगने से हक मिलता कभी ना पैसे के […]
मैं तेरी सूरत का दीवाना हूँ कबसे। मैं तेरी चाहत का अफ़साना हूँ कबसे। अंज़ामें-बेरुख़ी से बिख़री है ज़िन्दग़ी- मैं तेरे ज़ुल्मों का नज़राना हूँ कबसे। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
खेलने लगी है जिंदगी मुझसे आज कल कुछ ज्यादा, चल मैं भी चाल चलती हूं ,पर कर तू एक वादा, तू अपनी चाल ना रोकना, मैं खुद का हौसला पहचानूंगी, तू यू ही पग पग […]
चाहता दिल सदा से मुझे, इन पर्वतों की श्रृंखलाओं में, इन नदियों की चंचलता में, इन झडनो की घुंघरू में, इन देवदारो की घनेरी छाव मे, इन वादियों मैं कहीं खो जाऊं, आती है मिट्टी […]
काश। मैं टूटे दिलों को जोड़ पाता आँधियों की राह को मैं मोड़ पाता। पोंछ पाता अश्क जो दृग से बहे वक्त की जो मार बेबस हो सहे। चाहता ले लूँ जलन जो हैं जले […]
गुज़रा ज़माना याद दिलाता है ख़त। अब बीता ज़माना कहलाता है ख़त। रूठे को मनाना, हाले-दिल बताना, अपनों को अपना बनाता है ख़त। ना हुई कभी मुलाक़ात ना कोई बात, दो अंजानो को करीब लाता […]
चलो साथी एक खेल खेलते हैं, मोहब्बत के तार पर जिंदगी का राग छेड़ते हैं। एक सितार ही तो है जिंदगी, शुरुआत करते हैं करके वंदगी, उलझी तार तो सुलझाएंगे, सरगम से नया सुर बनाएंगे, […]
कर ले राम भजन रे भाई। राम भजन की महती महिमा वेदों ने है गाई । तड़े अजामिल गणिका तड़ गई तड़ा सदनकसाई।। ध्रुव प्रह्लाद विभीषण सबरी सतानंद की माई। राम राम कह जरठ जटायु […]
दोस्ती ऐसा, जैसे खुदा की परस्तिश। दोस्ती में है, बेइंतिहा प्यार की कशिश। दोस्तों की दोस्ती पे है कुर्बान ये जान, हमें अज़ीज़ हैं, अपने सभी मोनिस। देवेश साखरे ‘देव’ परस्तिश- पूजा, मोनिस- दोस्त
आओ मनाएं हम ऐसी दीवाली, जिसमे न हो प्रदूषण का नामोनिशा, तब होगी हमारी सच्ची दिवाली, खुशी ऐसी किस काम की, जिससे हम सारे हो परेशा, आओ मनाए हम ऐसी दीवाली, जिसमें न हो प्रदूषण […]
न जाने तुम कहां खो गए, भरी दुनिया में जाने कहां खो गए, हम यहां तेरी याद में भटकते रह गए, हर शख्स में ढूंढा मैंने तेरा चेहरा, मिले न तुम बस तुम तन्हा कर […]
देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावली अन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने “दिवाली” जो कभी थी […]
जो तू सीने से लगा ले । मय की तलब भूला दे । खुमारी कम नहीं मय से, लबों से जाम पिला दे । यूँ तो पीता नहीं लेकिन, नशा तेरा जहाँ भूला दे । […]
न रात को नींद न दिन को चैन है, तेरी वेरूखी से दिल बडा बेचैन है, जब तक चाहा दिल से खेला तुमने, भर गया जी तो पलटकर देखा भी नहीं तुमने, तेरी बेवफाई बहुत […]
हर पल आँखों में रहती तेरी तस्वीर है। माने या ना माने, तू ही मेरी तकदीर है। गर बन जाओ तुम, मेरी सदा के लिये, ये सुहाने पल हो सकती मेरी जागीर है। देवेश साखरे […]
मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी […]
जिसे देख देख कर मैंने पुरी ग़ज़ल लिख डाली, वहीं रूबाई में औरों का नाम ढुंढता है। मेरी हर रात गुजरी इंतजार में झरोखे पर, वो है कि मिलने को कोई शाम ढुंढता है। चांद […]
कवि बनना आसान नहीं, हृदय के उद्वेगो को माला में पिरोना कोई खेल नहीं। झुरमुटों के जंगल से जज्बातों को एक-एक करके बाहर लाना कोई खेल नहीं। जिंदगी खुली किताब ना बन जाए संभल कर […]
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