अंतस् में है पीर पीर का रोना रोकर नहीं भला कोई बन पाया है सब कुछ कर-कर कदम- कदम दे साथ फिर गया छोंड़ वह राह उसकी राह निहारती है प्रज्ञा दिन-रात रात ये बड़ी […]

तारीफों जो पुल बांधते हो अच्छें लगते हैं बातों ही बातों में हँसा देते हो ये अंदाज अच्छे लगते हैं यूं तो मोहब्बत हम भी करते हैं पर उसे सरेआम नहीं करते हैं बुरे नहीं […]

होगी बेशुमार दौलत आपके पास पर हमारे पास गजब का हुनर है देर से ही सही पर इंसान समझ जाते हैं किसी दूसरे पर आश्रित ना होकर खुद कमाते हैं और खुद खाते हैं जिस […]

जवाब तो तुम्हारी हर बात का है हमारे पास पर हम तुम्हारी किसी बात का जवाब देना जरूरी नही समझते.. ये मत समझना ना समझ हैं हम और कुछ नहीं समझते हम तो उनमें से […]

प्यार के धोखों से इतना तंग आ गये हम कि अब मोहब्बत के सिवा सब अच्छा लगता है… कहने को तो मोहब्बत हमने भी बहुत की थी…

बेबस बालक की होली कैसे हो रंगों से भरी ? एक तो तन पर फटे पुराने चीथड़े लिपटे हैं दूजे दो निवालों की खातिर दुधमुहे बालक तरसते हैं कितना कठिन होगा इनका जीवन यही सोंचकर […]

होली की धूम मची कान्हा की खातिर राधा सजी बैठी नैन बिछाकर होंठों पर रंग लगाकर श्याम के रंग में रंग जाऊं बन जाऊं मैं चाँद पुष्पों के संग खेलकर कब आएंगे श्याम ? कब […]

रंग रंगीली होली आई, सबके मन उमंग भर लाई l इंद्रधनुष धरा पर उतरा, रंगा, रंग से कतरा कतरा l रंगे रंग से सबके गाल, लेकर घूमें सभी गुलाल l गुजिया, लड्डू खूब खाए, रंग […]

फूलों और गुलाल के रंग, लेकर आए बधाई संग l लगा लो रोली, बाॅंध के मौली आने को है रंग बिरंगी होली l रंगभरी एकादशी की, आज सबको है बधाई l अबीर और पिचकारी लेकर, […]

होली में फूल खिला दे हँसी के, होली में फूल खिला दे। प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे फूल ही फूल खिला दे। हँसी के— ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी, होली में ढंग दिला दे। हँसी के होली में फूल खिला […]

छवि तेरी मन भाये सुबह सब ओर मनोहर कोमल सी, बिखर रही है लाल अरुणिमा मिहिका बिखरी मुक्ता सी। जागूँ देखूँ स्वच्छ सुबह को त्याग अवस्था सुप्ता सी। तेरी मन भाये सुबह सब मनोहर कोमल […]

गाऊँ गीत मनाऊँ होली खुशी मनाऊँ मन ही मन रंग की रौनक जहाँ तहाँ हो खूब सजाऊँ अपना तन। लाल व पीले, हरे, गुलाबी सारे रंग उड़ाऊँ मैं, खुद का चोला खुद ही रंग लूँ […]

ख़त कोई प्यार भरा लिख देना मशवरा लिखना दुआ लिख देना कोई दीवार-ए-शिकस्ता ही सही उस पे तुम नाम मिरा लिख देना कितना सादा था वो इम्काँ का नशा एक झोंके को हवा लिख देना […]

तन है चोला मिट्टी का, वस्त्र तेरे कोई शान नहीं । मिट्टी में मिट्टी मिल जायेंगे , वस्त्र तेरे उतार लिये जायेंगे । कर लो सदुपयोग नर तन का, यहीं तो काम आवेंगे ।। ————————————— […]

महफ़िल का माहौल इस कदर न बिगाडिए किसी पर यूॅं कीच न उछालिए खुद के गिरेबां में ग़र झाॅंक सको तो ठीक वरना किसी और पर यूॅं, तोहमत तो ना लगाइए l ताप हमारे अंदर […]

सुन्दर तेरी रचना अति सुन्दर तेरी रचना विधाता रंग बिरंगी सृष्टि रची, जा में नाना तरह जीवजाति बसी। नाना तरह की, विविध तरह जीवन ज्योति जगी। अति सुन्दर तेरी रचना विधाता, कल-कल करती नदिया-झरने वन-उपवन, […]

होली का त्यौहार है, रंगों की बौछार है, कहिए आपका क्या हाल है हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl रंग बरस रहे हैं इस बार, बीते बरस ना आई यह बहार l कोरोना के कारण […]

मेरे गीतों में बह आई, रंग भरी नव सरिता, खूब बहारें भरकर गाई, रंग भरी यह कविता। खूब अबीर गुलाल उड़ायें, गायें और बजायें। जीवन की सारी उलझन को, आओ दूर भगायें। खुश रहना ही […]

जय श्री सीताराम ————————— सब पे कृपा करते हैं राम सबका जीवन सँवारते हैं राम जिसका न कोई संगी न साथी उसका सहायक है राम ।।1।। ———————————- जगत का आधार हैं राम सृष्टि के कण-कण […]

मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।2।। ———————————————- मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।1।। ———————————————— तेरे […]

जो सुख है ब्रह्मचर्य में, वो सुख नहीं है, दुनिया के झमेले में । ——————————— रीढ़ की हड्डी टूट जाती, बुढ़ापा आने से पहले . कमर की पसलिया कहती रे मूरख कामी लाठी पकड़ ले […]

जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार — 2 —————————————— जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार […]

गाली न दे मुझे आली नहीं मारी तुझे पिचकारी मैंने मारी नहीं पिचकारी, भर कर रंग, चला कुंज गलियन, मारी नहीं पिचकारी। शायद तुझको भूल हुई है या यह मेरी राह नई है, मगर यही […]

किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे -2 ——————————– किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे ।।1।। ——————————— जो कमाया है तु मर-मर के वो चुकाना पड़ेगा, तुम्हें रो-रो के एक-एक वक्त, एक-एक […]

सौ दीप जला लो मंदिरों में चाहे हजारे दीये जल तेरे आँगन में जब तक मन की तम ना होंगे दूर तब-तक है तेरे सारे दीये की रौनक सून ।। ———————————————- एक दीप जलाओ ऐसा […]

पावक उग आ तू मेरे मन में, भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की, एक- एक कर खोज -खोज कर दुर्बलताएँ दूर करूँ निज। बहुत हो चुका डगमग डगमग अस्थिर मन अस्थिर तन लेकर भटक रहा जो […]

लब खुलें तो सत्य बोलें अन्यथा पट बन्द हों, ईश ऐसी शक्ति देना, भाव में नव छन्द हों । याचना है ईश तुझसे, काम से मतलब मुझे हो, और राहों और बातों से नहीं मतलब […]

पावस बहती आंखों में तुम नीर-सा बनकर आए अविरल बहते रहे हृदय में कितने छाले उभर आए किंकर्तव्यविमूढ़ बने हम तेरा साथ पाकर के जो बन पाने को आतुर थे वह ना हम बन पाए […]

खोजता मन है खिलौना आसमां छत धरा बिछोना गेहूं की बाली सी कोमल और स्वर्ण सी जटाएं बोलती मिश्री हैं मन में काली-काली ये फिजाएं धुंध छाए आसमां पर कौंध बिजली की उठी लिपटकर स्वर्ण […]

आ बैठ पास मेरे ओ याद! भूली बिसरी, आ अश्रु! नैन में आ या मुँह में आ जा मिश्री। बीते पलों की खुशबू तू उड़ कहाँ गई है, ओ मन की लालसा तू धुल कहाँ […]

मन बना पाहन न कारण है पता, तोय के धोए से केवल धुल गया। फिर मरुत से भाप बनकर उड़ गया, राज भीतर का वो भीतर रह गया। यामिनी भीतर ही बैठी रह गयी, दामिनी […]

आजकल सो पा रहा है वह जरा फुटपाथ पर, ठंड कम लगने लगी ठिठुरन हुई कम आजकल। बीते दिन जाड़ों में रोया रात भर सिकुड़ा सा सोया बच गया बस जैसे-तैसे सोच मन में खूब […]

बालों में लगे रबर की तरह खिंचे चले जा रहे तो तुम, खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो सभी को एकजुट, जिससे निखर रही है चोटी, एकजुटता से ही हम छूँ सकते हैं चोटी, […]

खूब बातें हो गई हैं, अब लगो उत्थान में, देश आशा में लगा है, मत चलो अवसान में। खूब दूजे पर उछाला कीच अब रहने भी दो, एक दूजे को समन्वित बात तुम रखने भी […]

जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे, झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे। गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना, हे ईश! मुझे वर देना तुम, […]

जल, ढूंढते रह जाऐंगे प्यासा कौवा जुगाड़ से, पानी ऊपर ला रहा। जल की कीमत मूक पक्षी, वास्तव में पहचान रहा।। हम मनुष्य दिमाग वाले, व्यर्थ जल बहा रहे। लापरवाही की हद, से भी ऊपर […]

निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान, मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान, अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ, ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ। कहे कलम आशीष, एक अनमोल […]

इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे आईने शक्ल बदले हर रोज जैसे शायद उम्र का नया सा पड़ाव हो या फिर बीते पल का हिसाब हो नहीं तो राजनीति का झुकाव हो वरना दमदार […]

ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये, रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये। रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये, बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये। दर्द में डूबे […]

तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो तुम मेरी आकांक्षाओं का आकार हो साकार होगा हर स्वप्न मेरा गर तुम जो मेरे साथ हो तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के बिम्ब हैं तुम हमारे हम तुम्हारे प्रतिबिम्ब […]

असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]

फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ, आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ। दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ साँझ हो चली दीप जलाऊँ। चादर ओढ़े लालिमा की, साँझ सुहानी जाने लगी है। दीपक की रौशन लौ से, एक […]

आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]