नारी तू जो चाह ले रच दे नव संसार तू होने वाले अपमान का करती क्यूँ न प्रतिकार तू ।। कभी दाव पे लगा दिया खुद तेरे ही परमेश्वर ने मौन हुए सब देख रहे, […]

अभी-अभी कुछ बूंदों से रूबरू हुए, चमकते हैं मोती से, बरसते हैं बुंदों की तरह। पर आयानास ही नहीं बरसते। जब बनते हैं गम के बादल, सिमट जाते हैं पलकों पर। फिर गिरते हैं धीरे-धीरे […]

क्या नया है इस जीवन में, वही रोज की शाम सुबह है। जब हम थक जाते हैं, फिर उम्मीद के झरोखों से, झाकते हैं। बदल जाता है वह सब कुछ, हर सुबह न‌ई-सी लगती है, […]

आईने तू इस तरह से मत दिखा तो शक्ल मेरी इन दिनों यौवन में हूँ चिंताएं मेरी लाजमी हैं। सोचता था मैं, कड़ी मेहनत से तारे तोड़ लाऊं। लेकिन यहां तो सारे पथ हैं बन्द […]

मुझे मिले नहीं भगवान हाय, मन्दिर के भीतर। मैं बना रहा नादान हाय, मन्दिर के भीतर।। मातु-पिता सच्चे ईश्वर हैं क्यों न तू पहचान करे। जन्म दिया और पाला-पोषा पल-पल हीं कल्याण करे।। सेवा बिना […]

वो हर कदम साथ देती थी मेरा, चाहे जितनी मुसीबतों ने हो घेरा.. हर मन्दिर में मेरी सलामती की दुआ मांगती थी, मैं बन जाऊं बड़ा यही मुराद मांगती थी.. पैरों में जूते भी ना […]

तुम बिल्डर हो उम्र में इल्डर हो हो सके तो मेरे मन के किसी कोने में अपना घर बना लो। वीरान -सा छाया है हर तरफ यहाँ पर अपने प्यार का सुंदर -सा शहर बना […]

तुम और हम एक ना हो पाए इसका कोई मलाल नहीं चलो एक तजुर्बा तोह हुआ जिंदगी साथ नहीं ना सही यादों का पिटारा तोह हुआ ना तुम गलत थे ना मै सही वक़्त गलत […]

जो मिला नहीं वह कभी तेरे लिए बना नहीं उसी की चाहत मे क्यों जिए जाता है जो तेरे पास है उसी मे खुश रहना सीख इसी का नाम मिडिल क्लास है

ढूढ़ते हैं रब को हम मंदिरों, गिरिजाघरों में भूल जाते हैं कि ईश्वर हैं स्वयं अपने घरों में। देख लो माँ-बाप को ईश्वर दिखेगा आपको बस जरा सच्ची नजर हो रब दिखेगा आपको। जो घरों […]

जब वो अपनी स्याह भरी गेसूओं को अपनी अंदाज से संवारने लगी। खुदा की कसम तब वादियों के नियत भी धीरे धीरे बदलने लगी।।

खूबसूरती को तुम्हारी, क्या नया उपमान दूँ, उपमान तो कितने ही बेहतर दूं ,भले न दे सकूँ लेकिन इतना तो कर सकूं कि घर के बाहर व भीतर तुम्हें उचित सम्मान दूं।

आज हमारा जीवन रक्षक, अन्न- दाता कर्म भूमि छोड़ कर दर – बदर सड़कों पर, संघर्ष करता, गरीब हर साल और गरीब होता जाता, सदियों से हक के लिए लड़ता , हर बार ठगा जाता […]

राहों में गर कांटे बिछे हों, तो बुहारना कब मना है । है अगर अंधियारी राहें , एक दीपक जलाना कब मना है । साथी कोई प्यारा, साथ छोड़ जाए, बीच – राह में, कोई […]

सदा अगलात ही न खोज मेरी वाणी में, कभी तो सत्य के अल्फाज भी ग्रहण कर ले। प्यार के नैन को उपयोग में ला, बन्द नफरत की निगाहें कर ले। न भर अस्काम खोज कर […]

रोजगार की बात करना भी जरूरी है क्योंकि रोटी जीवन के लिए जरूरी है युवा जो तैयारी कर रहे हैं प्रतियोगिताओं की उनके लिए परीक्षाएं होना भी जरूरी है। विज्ञापन नहीं निकलेंगे, परीक्षाएं नहीं होंगी […]

आज अवसादो से जुङा है रिश्ता अपना मुस्कुराना भूल गए, कहाँ होता है हंसना अपना वो बात- बात पर रूठकर चुप होके बैठे रहना थोड़ी- सी गुदगुदी पे खिलखिला के हंसना गम की परछाई नहीं,इतरा […]

हर मुश्किल को चुनौती देने की हमारी रवायत है हम नारी हैं, हर रिश्ता हमारे लिए एक इबादत है । हर नामुमकिन को मुमकिन बनाना अपनी आदत है हर खुशी, स्वप्न की अनदेखी कमजोरी , […]

ख्वाहिशों की बदलियां छटने लगी हैं आजकल मुहब्बत की रेत फिसलने लगी है आजकल काजल आँखों का दुश्मन बन बैठा है मेहंदी से भी अब कोई कहाँ नाम लिखता है दिल की किताब के सारे […]

कविता-किताब मेरी —————————- इतनी खूबसूरत तो नहीं है । जो तेरे लिये दिन रात तड़पता हूं । तू किताब मेरी,बसी तुझी में जान है तभी रात भर जग जग के पढ़ता हूं। जिसने किया बेवफाई […]

महामारी से बचो मास्क मुंह तक नहीं नाक तक लगाना है खुद को बचाना है सबको बचाना है। जितना हो सके उतनी सावधानी हो, नियम पालन करो यदि आपने मानवता बचानी हो।

आक़िबत जो भी हो परवाह नहीं करते हैं, हमें तो कर्म करना है मेहनत की बात करते हैं। आग सीने में थोड़ी सी बचा के रखते हैं, उसी से गम के अंधेरे मिटाया करते हैं। […]

जा रहा हूँ आज फिर परदेश जहाँ से आया था धर प्रवासी मजदूर का वेश छोंड़ी थी जो गलियां यह सोंचकर मैंने के कभी ना लौटकर अब आऊंगा घर की बची रूखी-सूखी ही खाऊंगा जब […]

आज भी माँ की गोद में सिर रखकर सो लेता हूँ होता हूँ उदास कभी तो लिपटकर रो लेता हूँ माँ को गुजरे जमाने हुए हैं मगर मैं आज भी माँ से मिलकर प्यार बटोर […]

कभी कल्पना की गलियों में, जब कवि-रूप में मैं चली । फ़िर जो देखा स्वपन-लोक में , उसका वर्णन करने चली । सुन्दर शहर है सपनों का , कुछ अनजाने कुछ अपनों का । सुन्दर-सुंदर […]

किस तरह की अहमियत है आपकी इस जिन्दगी में, चाह कर भी कह नहीं पाते हैं हम बिन कहे भी रह नहीं पाते हैं हम। दायरे हर बात के निश्चित किये हैं जिंदगी ने दायरों […]

सरकारें बदलती हैं यहाँ पर नवयुवकों को आश्वासन देती हैं झूठे भाषण देती हैं पर नौकरियां नहीं देती हैं हर जगह लम्बी हैं कतारें व्यवस्था में हैं खामियां बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी […]

हर तरफ तेरे नजारे नजर आ रहे है | तेरे इश्क के इशारे नजर आ रहे है | हुश्न ऐसा चाँद फीका हुआ जाता है | अंधेरों हुश्न करारे नजर आ रहे है | आंखो […]

ऊंचे-ऊंचे घरों में , रहने वाले लोग, आजकल घरों में ही रहते हैं, मगर मैं निकला हूं बाहर, साहेब ! रेहड़ी लेकर, खाली उदर बच्चों का, टिकने ही नहीं देता है।

आप हमेशा सलामत रहें अपना जन्मदिन मनाते रहे । आज वैश्विक मंच पे हमारे भारत को गौरवपूर्ण स्थान दिलाया है आपने एक उभरती शक्ति का अहसास, अपनी एक अलग पहचान बनाने का विश्वास हम सबो […]