असर है आपका शायद कि हम भी बन गए शायर किया इजहार शायरी से ज़माना कह न दे कायर।
असर है आपका शायद कि हम भी बन गए शायर किया इजहार शायरी से ज़माना कह न दे कायर।
बादिया सी जिंदगी में आप बादल बन के बरसे, खूब हरियाली सजा दी जिंदगी के रोम हरषे। ख्वाब में सोचा न था आपको पाएंगे हम आपके आने से सचमुच चल गए जीवन चरखे। शब्दार्थ – […]
नाफ़हम मत समझना हम इशारा जानते हैं, आपकी नज़रों की जुम्बिश की दिशा पहचानते हैं। जर्ब मत दो इस तरह सीने में अपने नैन से सह न पाएंगे न जी पाएंगे फिर हम चैन से। […]
************* हे आराध्य प्रेम ! आज मैं तुम्हें प्रणाम करती हूँ क्योंकि तुम ही हो जिसने मुझे जैविक से सामाजिक प्राणी बनाया मेरे अन्तस में भाव स्फुटित हुए मन के कोंण रोम-रोम को सहला बैठे […]
हे हिमाद्रि ! सदियों से जब मैं नहीं थी तब भी तुम यूँ ही अडिग खड़े थे और आज भी एक इंच तक ना हटे भारत का शीर्ष मुकुट बनकर खड़े हो तुम गंगा को […]
जिंदगी ने सौगात में , खूबसूरत-सा लम्हा जरूर दिया , मासूम से हाथों ने जब , उंगलियों को मेरी थाम लिया।
हम आंखों से नहीं मुख से बात करते हैं जिसे चाहते हैं खुल के प्यार करते हैं। यह न समझो कि हम इजहार नहीं करते हैं, बड़ों के सामने थोड़ा लिहाज करते हैं। नुमाइश नहीं […]
ये ज़माना जो है दिखावे का ही है अंतर्गुणो को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है
मैंने जिंदगी को हमेशा सहेली बनाकर रखा, मगर वो है कि हमेशा दुश्मनी निभाती रहती है।
शिव गिरिजा संग आए घूमने पृथ्वी लोक में एक बार। कहीं पे देखा झगड़ा -झंझट और कहीं पे देखा प्यार।। पति -पत्नी की जोड़ी कोई झगड़ रहे थे आपस में। छींटाकसी और गालियों से माहौल […]
इत्तिफाक से हमने गुजीता किया जब आपके चमन को, गिरफ्तार कर लिया तब आपने हमारे गुमगश्ता मन को। अब ऐसा लगता है इत्तमाम पा लिया है, आप हैं तो जीने का इंतजाम पा लिया है।
जब से तुझसे मिला दुगनी हयात होती गई, मेरे लिए तू मेरी कायनात होती गई.. यूँ रहा रंग भी अब तक की मुलाकातों का, के लब खामोश थे आँखों से बात होती गई.. न कोई […]
रास्ते कठिन है प्यार के, फिर भी मैने हिम्मत नहीं हारा। तुम तो थोड़े ही दूर चल के कहने लगे अब मैं जीवन से हारा।।
…….. हास्य- रचना.. विवाहित व्यक्ति, पत्नी से शिकायत करे यूं, क्या कमाल की सब्जी बनाई है, लव यू । बस, नमक थोड़ा सा ज्यादा है, सुनो, आज तुम्हारा क्या इरादा है । मेहमान आएं तो […]
इश्क़ क्या करे हम, वो कहते है इसके पास दिल ही नहीं है। उन्हें क्या पता कभी कभी बिन बरसात के ही हम भीग जाते है।।
ठीक कहा तुमने पायें यदि मानव तन अगले जनम में, या बनें, कीट, पतंग, जंगली जानवर, अपनों के बीच अपने हो सकने वालों के बीच ही जनम पायें। न जुदाई का भय हो न दूर […]
हम इतने भी नादान नहीं थे, जितना की वो मुझे समझते थे। कस्मे वादे मुझ से करते थे, इश्क़ जनाब कहीं और फरमाते थे।।
मासूम बचपन कुचला जा रहा भीतर से सहमा, बाहर से उददंड हुया बिखरता हुया , गैज़ेटस के तले , अपनों के स्नेह-सानिध्य से वंचित सहमा हुया, आयायों के तले , सर्वगुण- संपन्न बनाने की होड़ […]
वो भी क्या दौर था जवानी का पहला पहला साल था इनायत थी परवरदिगार की अचानक वो रूबरू हुआ था । पेहेली नजर में दिल दे बैठा था में शायद फ़तेह पाली थी उसने मेरी […]
बिना आपके सोचना भी मना है बिना आपके पथ अंधेरा घना है, बिना आपके जिन्दगी है अधूरी पास ही रहो, जीने को हो जरूरी।
अब्सार आपके समुन्दर हैं प्यार के, सुकूँ मिल रहा है, आपको निहार के। प्रातः की बेला है नई रोशनी है, आप हो बगल में और क्या कमी है। सदा पास रहना यूँ ही मुस्कुराना, यही […]
बड़ा ना समझ है यार मेरा हमसे पूँछता है कौन है वो ? थोड़ा दिमाग नहीं लगा सकता!!
आपने जब हमें मित्र अपना कह दिया यकीन मानिए, जलवा हमारा बढ़ गया। अब ये माथा आपका झुकने न देंगे हम कभी आपको सिर-माथ पर हमने सजा कर रख लिया।
तेरी तारीफ में क्या कहूँ लफ्ज कम पड़ रहे हैं तू खूबसूरत है इतना अरमां मचल रहे हैं
।। आवारा से क्या पूछना इश्क़ किसे कहते हैं।। ।। हवस के नजरों से देखना भी क्या इश्क़ है।।
नहीं कुछ और कहना है आपके साथ चलना है ।। स्थितियां अनुकूल हो न हो सुख से मुलाकात हो ना हो पर हर घङी, हर कदम मेरे हमदम, न रुकना है आपके साथ चलना है […]
कब तलक निगाहें यूँ चुराओगे है यकीन एक दिन तो पास आओगे..
आज भी हम तुम्हारी एक ही मुस्कान पर, सैकड़ों शायरी बना सकते हैं तुम मुस्कान तो दो। आज भी शब्दों के फूलों को बिछाकर राह में स्वागत करेंगे, तुम, हमें आने का कुछ पैगाम तो […]
चल हट जा !! नहीं करना है मुझे इश्क़ विश्क़ मैं बर्बाद होता गया ले ले के इश्क़ में रिश्क़।।
कवि कलम कहती है मत रह तू निराशा में पथिक, भूल जा बीती सभी कुछ चुन नई राहें पथिक। याद मत कर दर्द को या दर्द की उस बात को तू, भूल जा बच्चा सा […]
सोच रहा था की काश मोहब्बत मे भी चुनाव होते एकदम खुल्लमखुल्ला प्रचार होते ऐसा गजब भाषण देते के एक ही रॅली मे आपको अपना बना लेते
तेरे प्यार मे इतने दिवाने थे मेरे सनम के तेरे नाम को अपनी हतेली पर जबरन जोड चुके थे हम अच्छी वाली जिंदगी का ख्वाब तेरे संग ही बुना करते थे हम एक पल भी […]
मेरे होंठों की मुस्कान पर ना जाओ दोस्तों! ये तो मेरे यार की तरह फरेबी है! मेरे आँसू हैं मेरी असली पहचान जो बंद कमरे निकलते हैं कभी तकिये से आकर पूँछों हम उसे कितना […]
फिर मुस्कुरा दो ठीक वैसे ही कि जैसे मुस्कुराए थे मिले पहली दफा जब। जिंदगी की आपाधापी चलती रहेगी अंत तक प्रेम को भी दें समय सच्चा यही है फलसफा अब।
मेरे जीवन की कहानी दुःख ही रही आखिर क्या लिखूँ आज जो अभी तक मैंने लिखा नहीं… विधाता ने मेरे भाग्य में आँसुओं के सिवा कुछ भी लिखा नहीं… मेरे पतझड़ समान जीवन पर बरसात […]
दो पल बैठो पास हमारे ये पल यूँ ही गुजर जाएंगे दो पल का है साथ हमारा ये पल लौट कर ना आएंगे दो पल तुमसे बात तो कर लूँ ये पल पलकों में ही […]
कुर्सी क्या है ? कितना मुश्किल है इसे समझना। सब राजनीति की संरचना है, सुन रखे हैं पुराने वादें, अब नए वादों में फंसना है। ये तो कुर्सी का मसला है। कहीं सत्ता की चाल […]
पाक इश्क अक्सर होता नहीं, मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है! और जिस पर बरसता है, वो बहुत भीगता है, आंसुओं से भी और उस खुमार से भी!
“आज जरुरत है हिंदी की” आज जरुरत है हिंदी की हम सबको जोड़े रखने की शोषण – अत्याचार मिटा कर देश में अमन जगाने की आज जरुरत है हिंदी की ……………. स्वतंत्रता के घन-घोर संघर्ष […]
हमें क्या गिरा पाओगे, हमें क्या मिटा पाओगे, जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो, कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो, आज खुश है हमें छोड़ कर, यारों हम भी खुश […]
कुछ भी उसमें खास नहीं था, फिर भी उसे दिल में बसाया था, कोई हमसे छीन ना ले.. हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था मेरी तकदीर है, मेरी जन्नत की लकीर है, खुदा […]
अपने चहरे को इस तरह अपनी शक्सीयत के अनुरूप बनाइए… कि अपके पूरे विवरण के लिए… केवल चहरा ही काफी हों।। HEMANKUR❤️
दर्द का आलम सहसा बाढ़ बन गया, जब किताब के पन्नो में; उनकी तस्वीर रूबरू हुई।
कौन सा क़ासिद तुम्हारे पास भेजूं जो मुहब्बत की बता दे असलियत कौन सी कविता दूँ लिखकर साथ में प्यार की समझा दे थोड़ा अहमियत।
साँवरे, इसमें हमारा नही कोई दोष तुम्हारा ख्याल आते नही रहता होश हमारी तो क्या बिसात जब खयाल तेरा राधे को करता मदहोश।
बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो, जमाना कब तक उन्हें चुप कराता। जो खौफजदा है नहीं, उन्हें खौफ कौन दिलाता….!
झुक कर उठ जाती थी, उनकी नज़रें, हमारी मौजूदगी में। और अब आलम ऐसा है, कि उनकी नज़र, अब उठती ही नहीं।
मय से मैने पूछा ग़म की दवा है क्या आपके मयख़ाने में। मय कहा किस ग़म की दवा चाहिए आपको मयख़ाने मे।
तुम्हें ढूंढती रही निगाहें, बरसों बीतने के बाद। कभी तुमने ना खबर दी, न ही तुम तक आने का पता।
खोखलापन है तुम्हारी बातों में अब ना रही तेरे लिए मेरे दिल में वो जगह ! जो हुआ करती थी पिछली बरसातों में..
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