मैं बीता कल हूँ भले ही तुम्हारे लिए , पर किस के लिए तो आज हूँ मैं। तुम्हारी नजर में बेवफा हूँ। पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं। स्वयं ठुकरा के मेरी बाहों को, […]

वक्त ने किससे क्या क्या न करवाया है कभी रोते को हंसाया है तो कभी हँसते को रुलाया है कभी ख़ुशी से दामन भर देता है तो कभी ग़मों को तकदीर में शामिल कर देता […]

आजकल बड़े पैतरे आजमाने लगे हो तुम! मुझसे दूर जाने के… इतनी समझ आई कहाँ से तुम में? पहले तो तुम बहुत नादान हुआ करते थे… अच्छा तो अब ये भी मेरी संगत का असर […]

आज बहुत दिनों बाद आई हूँ तुम्हारे दिल की गलियों में.. सफर करने को जरा संभाल कर रखना अपनी धड़कनों को मुझे देखकर कहीं मचल ना पड़ें… यूं नजरों से देखने की कोशिश ना करो […]

कविता- वजह ——————- तन मे तुम हो, मन मे तुम हो दिल में तुमको रखता हूं| चाहे जितना मुझे भुलाओ, निस दिन तुम पर मरता हूं| जीने की वजह मेरी हो मरने की वजह मेरी […]

जन मन ने उत्साह सजाकर भारतमाता के चरणों में आज पुष्प अर्पित करके गुंजायमान नारों से कर राष्ट्रप्रेम की लहर जगाई, जन-मन मे उमंग भर आई। राष्ट्रपर्व पर सारा भारत दिखा एकजुट रहा एकजुट जिसे […]

दिल और कलम, कलम कह रही है आज ,कि मोहब्बत पे किताब लिखूं। दिल चाहता है मगर कि,मै गम बेशुमार लिखूं।। कुछ यूं है दलील- ए- कलम ,मोहबब्त लिखे बीते हैं बरस। दिल कहे कर […]

हर देश – वासी की ज़ुबान पर, आज जय – हिन्द का नारा है। ना .डाले कोई बुरी नज़र, ये वीरों ने ललकारा है । कारगिल का युद्ध हो, या हो घाटी गलवान खड़े मिलेंगे […]

कविता- डर था ——————— पागल था पागल हूँ पागल ही रहुंगा, यह तुम्हारी सोच है| तेरी नजरो मे , सब कुछ था| बस इंसान नहीं जानवर था| इंसान बनने कि कोशिश में, तेरे मुख से […]

ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है ये दर्द अब और ना सह पायेंगे बात जिस भाषा में समझते हो तुम बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे तुमने सोचा भी कैसे, हम […]

रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेंगे। वीर जवानो के गाथा फिर से हम दोहरायेंगे।। दो मिनट के मौन रख कर हम एक साथ। इंकलाब जिंदाबाद के नारा लगायेंगे।। वतन के लिए हमने क्या किया […]

“जंग ये खत्म हो लाखों की दुआ कहती है.. ज़िन्दगी खुद इसे साँसों की जुआ कहती है । सब तो देखा है सिसकती हुई इन आहों ने.. फिर भी ये बेबसी ‘सब कैसे हुआ’ कहती […]

आज आजादी की शुभ अवसर है , हे भारती नमन मेरा आपको है , आशीष दें आज आप मुझको , घर  के दुश्मनों को मिटा सकूँ , बाहरी दुश्मनों का संहार कर सकूँ , भले […]

आज की दिवा बड़ी गर्व की है, इस दिवा में भीष्म प्रण लेते हैं हम, आजादी के लिए जो शहीद हुए, उनका बलिदान ब्यर्थ न जाने देगें हम , सीमा पार  तो सेना निपट लेगा, […]

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]

*15 अगस्त का महापर्व* कभी सोने की चिड़िया सा, ये हिंदुस्तान हमारा था ! जमी पर जैसे जन्नत था, जगत जग-मग सितारा था ! लुटेरों ने इसे न जाने, कितनी बार है लूटा ! जुड़ा […]

आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने समाज जब संवेदनहीन हो जाये तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने तिरंगे के […]

जब भी कोई उम्मीद कभी, मेरे सर पर हाथ फिराती है .. माँ तेरी बहुत याद आती है.. माँ तेरी बहुत याद आती है.. कोई सतरंगी चादर गर, तेरी चूनर सी लहराती है.. माँ तेरी […]

हिंदुस्तान की रक्षा करना कर्तव्य है हिंदुस्तानी का हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई है एक ही दरिया पानी का । जब-जब है हिंसा की कटार से किसी धर्म का रक्त बहेगा रक्त बहा है किस धर्म […]

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]

आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]

आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]

कविता- चादर —————— रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ| सर सर टप टप आंसू बहता , रिम झिम सावन जस होता|| मिल न सके फिर , फिर से कदम, छोड़ गयी […]

नमन मेरा उन परवानों को, आजादी के दीवानों को, कुछ जाने से ,कुछ अनजाने से, क्रान्ति के मतवालों को, खेल गए जो मौत से, निडर रहे बेखौफ से, शहादत व बलिदानों को, नमन मेरा ,नमन […]

नींद में सपने में हम जाने कहाँ खो जाते हैं जो कभी देखा नहीं हो उस जगह हो आते हैं। घमंड में गुरुर में हम इस कदर गिर जाते हैं गरीब भी इंसान है इस […]

35: *स्वविजय करो * ****************** स्वयं दीप बनों । स्वयं नियमन करो ।। सभ्य, ज्ञानी, जागरूक हो तुम । खुद,खुद का संचलन करो ।। परस्पर सुरक्षित दूरी का,ध्यान रखते हुए । खुद सतर्क रहो ,नियमों […]

राष्ट्र पर्व पर सभी शत-शत नमन करें, देश के शहीदों को शत-शत नमन करें। तोड़ने जंजीर दासता की चल पड़े, सर कटा दिया झुके नहीं, नमन करें। राष्ट्र पर्व पर…. बिखरे हुए, टूटे हुए भारत […]

बहुत प्यारा था वह जहान लोग जहां मिलजुल कर करते थे काम जब कोई बगल से गुजरता कहता जाता भैया राम राम। जहां लोग एक दूसरे का दर्द बांटते हो जहां बुजुर्गों की बातें बेटे […]

एक शब्द ने मुझे हिला डाला , अच्छी चल रही थी जिंदगी, मगर रुला डाला। ये शब्द बड़ा मीठा सा, तीखा सा, बड़ा परेशान करे ,नींदों को हराम करें, शोहरत से बदनाम हुए, और वजूद […]

आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात […]

अपना देश कितना सुंदर कितना प्यारा। हर देश से प्यारा देश हिन्दुस्तान हमारा।। हिन्दी है हम हिन्दी ही मेरा परम धरम। इसलिए तो गर्व करे आज भी हिन्दुस्तान हमारा।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण वालों से […]

🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]

🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]

बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता था […]

“इसी तरह से हे महासत्य मेरा साथ तुम देना, इसी मिट्टी का हो जाने का वर हे नाथ तुम देना । जगत के दृश्य में कर्ता भले कोई भी हो लेकिन, मेरे काँधे, मेरे सर […]

ये बेबस सी दिखती है जो, ये उस निर्दोष की पत्नी है, जिसे संतों के संग कत्ल किया, ये उस खामोश की पत्नी है । क्या मिला है ऐसा कर तुमको, क्या हासिल कर ले […]

समन्दर भी ना जाने, उसमें कितनी नदियां समाती हैं। ये तो नदिया ही जाने, उसको कितनी सौतन मिल जाती हैं। मीठे – मीठे पानी की नदियां, समन्दर की ओर बह जाती हैं। फिर , मीठा […]

समझा रही हूँ बात तुम अब भी नहीं समझे, यौवन में है बरसात तुम अब भी नहीं समझे। चाहत भरी आंखों को तुम अब भी नहीं समझे, नहीं सो पाई पूरी रात तुम अब भी […]

जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग, वो भी आज, ज़माने से निकले। जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू, वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।