आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]

आदाब जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत क़सीदा हो, रुबाई […]

जय हिन्द साथियो पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में हर रूप में हैं […]

कविता- चादर —————— रुक रुक सुनले जरा फिर, फिर से मै आता हूँ| सर सर टप टप आंसू बहता , रिम झिम सावन जस होता|| मिल न सके फिर , फिर से कदम, छोड़ गयी […]

नमन मेरा उन परवानों को, आजादी के दीवानों को, कुछ जाने से ,कुछ अनजाने से, क्रान्ति के मतवालों को, खेल गए जो मौत से, निडर रहे बेखौफ से, शहादत व बलिदानों को, नमन मेरा ,नमन […]

नींद में सपने में हम जाने कहाँ खो जाते हैं जो कभी देखा नहीं हो उस जगह हो आते हैं। घमंड में गुरुर में हम इस कदर गिर जाते हैं गरीब भी इंसान है इस […]

35: *स्वविजय करो * ****************** स्वयं दीप बनों । स्वयं नियमन करो ।। सभ्य, ज्ञानी, जागरूक हो तुम । खुद,खुद का संचलन करो ।। परस्पर सुरक्षित दूरी का,ध्यान रखते हुए । खुद सतर्क रहो ,नियमों […]

राष्ट्र पर्व पर सभी शत-शत नमन करें, देश के शहीदों को शत-शत नमन करें। तोड़ने जंजीर दासता की चल पड़े, सर कटा दिया झुके नहीं, नमन करें। राष्ट्र पर्व पर…. बिखरे हुए, टूटे हुए भारत […]

बहुत प्यारा था वह जहान लोग जहां मिलजुल कर करते थे काम जब कोई बगल से गुजरता कहता जाता भैया राम राम। जहां लोग एक दूसरे का दर्द बांटते हो जहां बुजुर्गों की बातें बेटे […]

एक शब्द ने मुझे हिला डाला , अच्छी चल रही थी जिंदगी, मगर रुला डाला। ये शब्द बड़ा मीठा सा, तीखा सा, बड़ा परेशान करे ,नींदों को हराम करें, शोहरत से बदनाम हुए, और वजूद […]

आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात […]

अपना देश कितना सुंदर कितना प्यारा। हर देश से प्यारा देश हिन्दुस्तान हमारा।। हिन्दी है हम हिन्दी ही मेरा परम धरम। इसलिए तो गर्व करे आज भी हिन्दुस्तान हमारा।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण वालों से […]

🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]

🇨🇮 नया भारत 🇨🇮 कितने वीरो का बलिदान हुआ । तब नए भारत का निर्माण हुआ । मौसम बदला रुख भी बदली। तब जाकर हम दिलसाद हुऐ । हिन्दू मुस्लिम सब एक हुए तब जाकर […]

बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता था […]

“इसी तरह से हे महासत्य मेरा साथ तुम देना, इसी मिट्टी का हो जाने का वर हे नाथ तुम देना । जगत के दृश्य में कर्ता भले कोई भी हो लेकिन, मेरे काँधे, मेरे सर […]

ये बेबस सी दिखती है जो, ये उस निर्दोष की पत्नी है, जिसे संतों के संग कत्ल किया, ये उस खामोश की पत्नी है । क्या मिला है ऐसा कर तुमको, क्या हासिल कर ले […]

समन्दर भी ना जाने, उसमें कितनी नदियां समाती हैं। ये तो नदिया ही जाने, उसको कितनी सौतन मिल जाती हैं। मीठे – मीठे पानी की नदियां, समन्दर की ओर बह जाती हैं। फिर , मीठा […]

समझा रही हूँ बात तुम अब भी नहीं समझे, यौवन में है बरसात तुम अब भी नहीं समझे। चाहत भरी आंखों को तुम अब भी नहीं समझे, नहीं सो पाई पूरी रात तुम अब भी […]

जिन्हें समझते थे हम औरों से अलग, वो भी आज, ज़माने से निकले। जिनसे थी हमें चन्द खुशियों की आरज़ू, वो भी आज ,दर्द के जाने माने से निकले।

कविता :कुछ पल नीला आकाश ,आकाश में उड़ते पंक्षी सागर की लहरें ,लहरों पर चलती नाव रिमझिम बरसता पानी ,वो ओस की बूंदे मानो सब कुछ कह देती हों ऐसा लगता है रख लूँ ,समेट […]

‘तुमसे तो चंद कदम तय भी हो सके ना कभी, मैंने मीलों का सफर चलके ही गुज़ारा है.. कम से कम तुम पर किसी कत्ल का इल्ज़ाम नही, मैंने तो उम्र भर ही ख्वाहिशों को […]

गम-ए-हयात की खातिर या किसी बात की खातिर, हम तो खामोश रहे इक नई शुरुआत की खातिर.. कुछ रहे पास, खुदा से ये भी बर्दाश्त ना हुआ, उसने आंँसू भी ले लिए मेरे, बरसात की […]

आज देखा फिर से उनको अजनबी से लग रहे थे, बात तो कुछ की नहीं लेकिन मजे में लग रहे थे। वे तो हमसे दूरियां रख दूसरों के हो लिए हैं, हम निरी तन्हाइयों खूब […]

राघव भक्तों के सदियों तक के बलिदान, संघर्ष और तपस्या का परिणाम अयोध्या की पावन भूमि का शिलान्यास और फिर भव्य मन्दिर का निर्माण । कितने भक्त मन में निर्माण की आस लिए कर गये […]

मातृभूमि के चरणों में जिन वीरों ने है लहू चढ़ाया उन वीरों को नमन हेतु यह पंद्रह अगस्त का शुभ दिन आया। करें तैयारी राष्ट्र पर्व की अति उत्साह सजाकर मन में, चलो कलम से […]

कविता- पहला प्यार ————————– ना शीतल मे चांद अजोरी, ना खुशबू मे बेला है| प्यास लगी पानी की जहर मिल गया | मांगा जिसे दुआ में, वही मुझपे कहर होगा गया| दिल दुख रहा है, […]

राष्ट्रीय पर्व आने वाला है भारत मां की जय बोलो पंद्रह अगस्त आने वाला है भारत माँ की जय बोलो। यह हम सबकी जन्मभूमि है मातृभूमि पावन भारत वीरप्रसूता जननी है यह भारत माँ की […]

प्रियतम की बस एक झलक पर हर आशिक जी जाता है आंखों की मदहोशी में वह जाने क्या-क्या पी जाता है अधखिली कली जब गालों पर ठहर ठहर मंडराती है मन के अंतर्द्वंद से मिलकर […]

मैं भी तो नन्ही कली हूँ, तेरे अंदर ही पली हूँ तू ही तो ज़रिया है माँ, मैं तेरे कदमों से चली हूँ बस मुझे इतना बता माँ, क्या मैं बेटे सी नही ? माँ […]

हर हाल में मुस्कुराना हमें आता है, अपने .गम भी छिपाना हमें आता है। छोटी सी कश्ती में घूम कर भी ख़ुश हो जाती है”गीता,” और, बड़े- बड़े सागर भी पार करना हमें आता है।

सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी जीवन को सही दिशा में ले जाने को हमें जरुरत है उनकी। सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी उन्हें हम प्यार करते हैं हमें जरूरत […]

वो कफन था जो दामन-ए-यार बना फिरता था, मेरा वहम मेरे अंदर ऐतबार बना फिरता था.. कुछ दिखा नही ज़माने में सिवाए मतलब के, एक मैं ही था जो दिलों में प्यार बना फिरता था..

हम तुम्हारे तुम हमारे खुशियां हमारी गम हमारे जिंदगी जी लेंगे तुम-हम एक – दूजे के सहारे। यात्रा इस जिंदगी की है कठिन, मुश्किल भरी है, लेकिन फतह कर लेंगे मंजिल एक-दूजे के सहारे।

कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे वो जो हर वक़्त बसे हैं ख़्यालों में मेरे कभी मेरी यादों में वो भी खो जाते तो होंगे […]

हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी? रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी। जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं, यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है। सागर है विशाल, लहरें […]

कविता- पहचान ——————– सुन्दरता मे सुन्दर हो, खुदा की बनाई मूरत हो, खुद पे इतना निर्भर हो, जब जब कोई समझाये अपने बच्चों को, बस आप ही उनके लिए उदाहरण हो| बिन चोट सहे, पत्थर […]

माखन निकाल रही यशोदा मैया ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया भूखे जब होंगे बाल गोपाल तब दूंगी उन्हें माखन निकाल अभी रख देती हूं इसे संभाल मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल हरि […]

वो आसां ज़िंदगी से जाके इतनी दूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता है । वो जब हालात के पाटों में पिसकर चूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता […]