जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर संशय के अँधियारों को, ये जीवन को नई भोर देती […]
जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर संशय के अँधियारों को, ये जीवन को नई भोर देती […]
कुछ दिनों से , एक इमारत का काम चल रहा था। वहीं आस-पास ही, कुछ मजदूरों का परिवार पल रहा था। छोटे-छोटे बच्चे, दिन भर खेलते रहते कुछ खेल। एक दूजे की कमीज़ पकड़कर, बनाते […]
भोजपुरी सरस्वती वंदना – विनवा के तार | झन झंकार बाजे माई तोर वीनवा के तार | हंस चढ़ी चली आवा माई हाली हमरे द्वार | अज्ञानी अनाड़ी तोहके हम हरदम पुकारेली | सुनर गोर […]
लाल ओढ़नी ओढ़ कर, देखो पलाश इठलाते हैं। वन में फैली है अग्नि ज्वाला, ऐसा स्वरूप दिखलाते हैं। होली आने से पहले ही, पलाश ने कर ली तैयारी। लाल रंग के पुष्प खिला कर, महकाई […]
मैं अन्नदाता देख अपनी थाली में खाना रूखा सूखा, हो उदास सोचे किसान फ़िर एक बार, हूँ किसान कहलाता मैं जग में अन्नदाता, रहता साथ अन्न के, मिले मुझे ये मुश्किलों से, मेहनत मेरी रोटी […]
ऋतुराज बसंत फिर आया है, जड़ पतझड़ फिर मुस्काया है। पेड़ पर हैं नव कोपल फूटी, फिर कोयल ने राग सुनाया है। पिली – पिली सरसों लहराई, भीनी खुशबू को महकाया है। छिप कर के […]
माघ मास का दिन पंचम, खेतों में सरसों फूल चमके सोने सम। गेहूं की खिली हैं बालियां, फूलों पर छाई बहार है, मंडराने लगी है तितलियां। बहार बसंत की आई है, सुखद संदेशे लाई है। […]
बातें बना रहे हो बेकार में अनेकों चाहत कहाँ है गुम सी पायल की मीठी छम सी। डग-मग कदम चले हैं जिस ओर हम चले हैं नजरों का फर्क क्यों है मन से तो हम […]
बैठे हैं आशा का दीप जलाए, उम्मीद की लौ मन में लगाए। व्यथा का तिमिर अड रहा, नैराश्य का आंचल बढ़ रहा नेत्र नीर नैनों में आए, प्रेम की दिल में ज्योत जलाए मन के […]
अपने मन का हर भाव लिखा करती हूं, कभी-कभी दुख तो कभी, अनुराग लिखा करती हूं। छोटी-छोटी मेरी खुशियां लिखने से बड़ी हो जाती हैं। बड़े-बड़े दुख के सागर, फ़िर मैं पार किया करती हूं। […]
1. जमाने की नजरों मे काफिर हैं हम क्योंकि मोहब्बत की मंज़िल के मुसाफिर हैं हम 2. आने दो गर्मी तो पहाड़ पिघल जाएंगे चट्टानों को तोड़कर समुंदर निकल जाएंगे लड़कपन है नौजवानी है अभी […]
बता तो दो क्यू तुम ऐसे हो, मेरे होकर भी परायों से कमतर हो। यक़ीनन दोष हममें, दुनियादारी की बूझ नहीं आकलन करें कैसे, रिश्ते- नातोंकी समझ नहीं साफ़ कहने की आदत, सुनने की हिम्मत […]
तुमने कहा की मुसलमान गलत है हमने मान लिया तुमने कहा लॉकडाउन मे घर वापसी कर रहे मज़दूर गलत है कोरोना संक्रमण का कारण है हमने मान लिया तुमने कहा किसान आतंकवादी है ख़ालिस्तानी हमने […]
जो हल जोते, फसल उगाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। जो मजदुर उत्पाद बनाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। भूख और लाचारी का ऐसा आलम है अब जान सस्ती है रोटी नहीं। जात और धर्म […]
एक महान विज्ञानी का कथन है… ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत प्रतिक्रिया होती है’..!! प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत उदाहरण हैं…. समाज ने जितनी तत्परता से रचे हैं प्रेमियों को एक दूजे […]
यह जीवन मेरा रहा है समर्पित हां बस तुम्हारे लिए। अपनी इच्छाओं के पंखों को अपने ही इन दोनों बाजुओं से टुकड़ों में बांट बिखेरा है हमने हां बस तुम्हारे लिए। अरमान मेरे ना गगन […]
आज प्रेम दिवस पर आई आपकी याद, जब देखे बागों में गुलाब, तब आई आपकी याद। आ गए याद कुछ बीते पल, आए याद कुछ मीठे गीत, कहां छिपे हो मन के मीत। आज अकेला […]
याद है हमको प्रेम दिवस ऐसा भी एक आया था! थी रक्तरंजित वसुंधरा, और आकाश थरथराया था!! एक कायर आतंकी ने घोंपा था सीने पर खंजर! ख़ून बहा कर वीरों का, बदला था वादी का […]
आज valentine’s day है मौसम मनचला सा हो रहा है हर और इश्क खिल उठा है याद कर रही हूँ खूबसूरत लम्हों को, नही, मुझे नही याद आ रही वो कपड़े, गहने, फूलों की लम्बी […]
बहुत दुख भरा दिवस है, आज राष्ट्रीय शोक का। टूटी थी किसी की राखी, और किसी मां की उजड़ी कोख का। इस दुख भरे दिवस को , आज,प्रेम दिवस ना कहना। आज ही के दिन….. […]
प्रेम के इजहार का दिन है प्यारे तू क्यों पीछे होता है, दे दे प्रिय को तोहफे में फूल, नहीं तो चुभेगा हृदय में शूल आँखों से बहेगी लघु सिंचाई की गूल इससे पहले कि […]
हे भारत कोकिला! मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा। वतन के लिए कर खुद को समर्पित जीवन तेरा स्वतंत्रता को अर्पित हैदराबाद में जन्मी अघोरनाथ की सुता कहाई माता दी कवयित्री निज रचना की लोङी सुनाई […]
वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में सिर्फ चूम के उसके माथे को…!! ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन और […]
भारत की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर सिंघु और टिकरी में यह कौन लोग का हुजूम है? देखो देखो यह लोग और कोई नहीं हमारे देश के अन्नदाता जो रोज मेहनत की पसीना बहाकर औरों का […]
●थकान  ̄ ̄ ̄ ̄ किसान के पास फ़सल की बोरियां भरते वक्त बोरियां भर थकान भी होती है…. लेकिन वह नहीं भरता थकान की बोरियां…. क्योंकि- वह जानता है थकान खरीद सके उतना दम नहीं फ़सल खरीदने […]
चिड़ियों के चहचहाने से पहले, बैलो के रंभाने से पहले जो जाग जाता है, ये तो वही मेहनत का पुजारी किसान है| अन्न को उपजाने में जिसकी दिन-रात बहती लहू और जिसकी लगती जान है, […]
तुम खालिस्तानी हो या पाकिस्तानी उतारा सेना को तो पड़ जाएगी भारी सब्र ठहरा है इम्तिहान मत लेना खून बहे तो फिर किसान आंदोलन मत कहना पुलिस की जान को क्या तुमने समान समझा है […]
सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता […]
रिश्ते क्षितिज की तरह मिले से प्रतीत होते हैं बंधन में बंधे लोग कब इक दूजे करीब होते हैं आकर्षण करीब लाता है विकर्षण भी खूब भाता है पास में टकराव है लेकिन दूरी से […]
जब आर्यन को फिलहाल मे किसी लड़की से सच्चा प्यार हुआ मगर अभी तक वे उस लड़की के सामने प्यार का पैगाम नही भेज पा रहे थे तब उनके दिल की प्रबल भावनाएं इस सुंदर […]
सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा आलिंगन करे तो उस प्रेम की ऊष्मा […]
कोई सो रहा हो, शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो, सूर्य की किरणें आएंगी, आ कर उसे जगाएंगी ऐसा वह सोच रहा हो किंतु यदि उसी ने, किरणों के प्रवेश का, बंद कर […]
बात एक शायर की करता हू जिसे अपनों ने ठुकराया वफ़ा की साजिस देखो बेवफाए मोहब्बत ने ज़िन्दगी की सबसे बड़े सच से वाकिफ बनाया की यह चलती जाती है सुर्ख हवाएं बस ये एलान […]
सोचता था हक़ से मांग सकता हू तुझसे कुछ भी देखा तोह वोह हक़ तूने कब किसी और को दे दिया जिस नाम को तबीर बना के घूमते थे वोह हर किसी के साथ जुड़ […]
बात शायद कम कीमत वाली की है हर चीज़ को दौलत से जो देखती हो पर प्यार सौ टाका तुमसे ही किया था
यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की अनन्त प्रतीक्षा में… क्योकि, प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म […]
खेतों के सब बीज शज़र हो जाते हैं सरहद पर वीर अमर हो जाते हैं तुम वर्दी पहने मिट्टी साने क्या बतलाते हो हम भी इनके जैसे हैं ये दिखलाते हो, सीखो जरा लाल अटल […]
आज छोटी बिटिया रानी एक बरस की हो गई है हाव-भाव से हमें लुभाती बड़ी सरस सी हो गई है। खुद के छोटे छोटे पांवों से कदमों को उठा रही है, मम, पप, अम्म आदि […]
भूमिपुत्र किसान भाई, तुम जिद्द अपनी छोड़ दो धरना प्रदर्शन की दिशा भी घर की तरफ मोड़ दो देश पर मण्डरा रहे ख़तरे को गम्भीरता से भांप लो तुम्हारी आड़ में मचा आतंक अब तुम […]
गीत – जान ए जिगर | तेरी नजर का करम मुझपर अगर हो जाये | मिल जाये साथ तेरा आसान सफर हो जाये | लहराकर तेरी जुलफ़े हवाओ जब बलखाती है| सच कहूँ बिन मौसम […]
खेतों से निकल कर सड़को पर क्यों उतर आना पड़ा, लाल किले पर उत्तेजित हो क्यों झण्डा लहराना पड़ा।। लेकर ट्रेक्टर रैली में बढ़ चढ़के क्यों डण्डा खाना पड़ा, रस्ते पर लगा टेण्ट रातों में […]
इंसान तेरे रूप अनेक कोई ईमानदारी का प्रतीक कोई बेमानी की मिसाल, कोई जलता दीपक मंद करता है कोई जलाता है मशाल, कोई शांति का प्रतीक कोई करता है बवाल कोई बेशर्मी की हद पार […]
तुमने जो किया सब भला ही किया, तुमने जो दिया सब भला ही दिया। आरम्भ भी तुम्हीं से और अन्त भी तुम्हीं तक, तुम्हारा बहुत-बहुत आभार ज़िन्दगी । बिखरते ही जा रहे थे, एक माला […]
आप खो गए थे मन उद्वेलित था अब आ गए हो है प्रफुल्लित सा। नभ में सूरज उदित सा, मन है मुदित सा। आपका होना रात को चाँद सा, काजल लगी आंख सा। मगर प्रविष्टि […]
उत्तराखंड की ऋषि गंगा में, ढह गया एक हिम-खंड। कुछ ही पलों में गिरी हिम-शिला, और नदिया उफन गई, ढह गए और बह गए, उस नदिया में घर कई। एक सुरंग में काम कर रहे, […]
वाणी से ही विष बहे, और वाणी से ही,बहे सुधा-रस धार। मीठी वाणी बोलिए, यही जीवन का सार। कण-कण में ईश्वर बसते, यही प्रकृति का आधार। निज वाणी से मनुज, न करना किसी पर प्रहार। […]
देखो देखो किसान है देश की रीड की हड्डी इनको ना तोड़ो तुम इन को मजबूत बनाओ तो देश मजबूत होगा इनको ना राजनीति की आग में मत झोंको किसान तो देश की अर्थव्यवस्था का […]
हिमखंड टूटा पानी का ऐसा प्रवाह आया वे पत्तों की तरह बह गए देखते ही देखते सैकड़ों लोग लापता हो गए। जाने कहाँ खो गए। चीत्कार- करुण-क्रन्दन से रो उठी घाटी, प्रवाह बह गया केवल […]
अनुकूल वातावरण मुश्किल से मिलता है या तो स्वयं ढलना पड़ता है या उसे अपने अनुसार ढालना पड़ता है। कर्म किए बिना कुछ नहीं होता है कर्म के बावजूद परिणाम में ईश्वर की इच्छा को […]
मोहब्बत में मेरा क्या हुआ, यह मुझको है पता। मोहब्बत में तेरा क्या हुआ, तू मुझको दे बता। मोहब्बत से तो पत्थर में भी प्राण आते हैं, बेरुखी से जीवित भी निष्प्राण हो जाते हैं।।
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