सोंच अलग है याददाश्त विलग है अपनी चाहतों के लिए वो आज हमसे अलग हैं लाखों जमा कर दोस्तों ने सारी उम्र की कमाई गवांई शहर की छोटी जमी के लिए वहीं पे सारी सुविधाएं […]
सोंच अलग है याददाश्त विलग है अपनी चाहतों के लिए वो आज हमसे अलग हैं लाखों जमा कर दोस्तों ने सारी उम्र की कमाई गवांई शहर की छोटी जमी के लिए वहीं पे सारी सुविधाएं […]
ख़ुद पर ऐतवार कर पर भूलकर भी न किसी पर विश्वास कर। खुद के ही बल पर अपने जीवन की रूपरेखा तराश कर।। कब कोई अपना,अपनी अंगुली को घुमा,तोहमत तुझपे लगा देगा तेरी हर जायज़ […]
लफ़्ज़ों की कमी थी आज शायद या रूह में होने वाले एहसास की 💐💐💐💐💐💐💐💐 नही पता मुझको कहानी तेरी शायद बस इतना जानती हूं कि वजूद को तेरे 💐💐💐💐💐💐💐💐 तूझसे ज्यादा जानती हूं शायद ख्वाबबगाह […]
सुन्दर सपने देख रही थी, अपनी माँ की कोख में। मात-पिता का प्यार मिलेगा, भाई का भी स्नेह मिलेगा यह सब सुख से सोच रही थी, सहसा समझ में आया कि एक कैंची मुझको नोंच […]
अपनी माँ को छोड़ कर, वृद्धाश्रम के द्वार पर। जैसे ही वो बेटा अपनी कार में आया, माँ के कपड़ों का थैला, उसने वहीं पर पाया। कुछ सोचकर थैला उठाकर, वृद्धाश्रम के द्वार पर आया। […]
आतंकियों के ठिकाने बदल रहे हैं शिकारियों के पैमाने बदल रहें हैं छिप-छिप के करते थे कभी ठगी जो लालच के उनके आशियाने बदल रहे हैं भोले-भाले को ठगना ही जिनका काम चींटियों की तरह […]
सारे व्यापार को तेरा आधार संबंधों में भी तुझसे ही है प्यार तुझमें ही सब और सबमें प्रकट तूं फिर भी सब में क्यूं भरा मैं मैं व तूं तूं पल पल के मीत जाते […]
गांव गांव में मारी जाती, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।। जूही बेटी, चंपा बेटी, चन्द्रमा तक पहुंच गई, मत मारो बेटी को, जो गोल्ड मेडलिस्ट […]
सब फूलों ने मिलकर, महफ़िल एक सजाई। किस की सबसे सुन्दर रंगत, और किस की महक मन भायी। बेला चमेली और मोगरा ने महक कर, वेणी खूब सजाई। गेंदा और गुलाब ने, मन्दिर में धूम […]
सागर ने सरिता से पूछा, क्यों भाग-भाग कर आती हो। कितने जंगल वन-उपवन, तुम लांघ-लांघ कर आती हो। बस केवल खारा पानी हूं, तुमको भी खारा कर दूं। मीठे जल की तुम मीठी सी सरिता, […]
हे मानव तेरी फितरत निराली, उलट पुलट सब करता है, बंद कमरे में वीडियो बनाकर, जगजाहिर क्यों करता है? शादी पार्टी में खाना खाकर, भरपेट झकास हो जाता है, बाहर आकर उसी खाने की, कमियां […]
आज होली जल रही है मानवता के ढेर में। जनमानस भी भड़क रहा नासमझी के फेर में, हरे लाल पीले की अनजानी सी दौड़ है। देश के प्यारे रंगों में न जाने कैसी होड़ है।। […]
भोजपुरी पारंपरिक होली गीत – ये किसन कन्हईया | होली मे करेला काहे बलजोरिया ये किसन कन्हईया | चुनरिया रंग देला मारी पिचकरिया ये किसन कन्हईया | केतनो लुकाई जहवा भाग जाई | खोजी हरदम […]
हवाओं ने मौसम का, रूख़ बदल डाला। बसन्त के आगमन का, हाल सुना डाला। नवल हरित पर्ण झूम-झूम लहराए। रंग-बिरंगे फूलों ने, वन-उपवन महकाए। बेला जूही गुलाब की, सुगंधि से हृदय हर्षित हुआ जाए। कोमल-कोमल […]
पारिजात के फूल झरे, तन-मन पाए आराम वहां। स्वर्ग से सीधे आए धरा पर, ऐसी मोहक सुगंधि और कहां। छोटी सी नारंगी डंडी, पंच पंखुड़ी श्वेत रंग की। सूर्य-किरण के प्रथम स्पर्श से, आलिंगन करते […]
जब कभी भी टूटे ये तंद्रा तुम्हारी, जब लगे कि हैं तुम्हारे हाथ खाली! जब न सूझे ज़िन्दगी में राह तुमको, जब लगे कि छलते आये हो स्वयं को! जब भरोसा उठने लगे संसार से […]
“बदली जो उनकी आंखें इरादा बदल गया। गुल जैसे चमचमाया कि, बुलबुल मसल गया। यह कहने से हवा की छेड़छाड़ थी मगर खिलकर सुगंध से किसी का, दिल बहल गया।” सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की, […]
किसी की सिसकियां सुनती थी अक्सर, कोई दिखाई ना देता था। देखा करती थी इधर-उधर, व्याकुल हो उठती थी मैं, लगता था थोड़ा सा डर। एक दिन मेरा मन मुझसे बोला.. पहचान मुझे मैं ही […]
कहती है निशा तुम सो जाओ, मीठे ख्वाबों में खो जाओ। खो जाओ किसी के सपने में, क्या रखा है दिन-रात तड़पने में। मुझे सुलाने की कोशिश में, जागे रात भर तारे। चाँद भी आकर […]
दर्द बनके आँखो के किनारों से बहती है! बनकर दुआ के फूल होंठो से झरती है!! देती है तू सुकून मुझे माँ के आँचल सा! बनके क़भी फुहार सी दिल पे बरसती है!! खुशियाँ ज़ाहिर […]
मूसलाधार बारिश से जब, बर्बाद हुई फ़सल किसान की बदहाली मत पूछो उसकी, बहुत बुरी हालत है भगवन्, धरती-पुत्र महान की। भ्रष्टाचार खूब फैल रहा, काले धन की भी चिंता है। मगर किसी को क्यों […]
मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया, ले रखले जुल्फ़ों को तू, पड़ा रह सदा सदा।। फेसबुक […]
वह पढ़ना चाहता है जीवन से लड़ना चाहता है। आगे बढ़ना चाहता है किंतु क्या रोक रहा उसको, कोई टोक रहा उसको बाप कहे कुछ कर मजदूरी, ऐसी भी क्या है मजबूरी चंद सिक्कों की […]
वो बूढ़ी थी, गरीब थी भीख नहीं मांगी थी उसने, पैन बेच रही थी राहों में मेहनत का खाने की ठानी, मेहनत का ही खाती खाना मेहनत का ही पीती पानी। कहती थी यह पैन […]
काँव काँव मत करना कौवे आँगन के पेड़ों में बैठ तेरा झूठ समझता हूं मैं सच में है भीतर तक पैठ। खाली-मूली मुझे ठगाकर इंतज़ार करवाता है, आता कोई नहीं कभी तू बस आंखें भरवाता […]
मनुष्य हो तुम मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को पास आने न दो। दया का भाव रखो प्रेम की चाह रखो ठेस दूँ दूसरे को भाव आने न दो। दया पहचान है कि आप […]
इतना अच्छा या बुरा नहीं हूँ, जितना कि दुनिया कहती है । मैं कैसा हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।। ———————————————– मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ […]
प्रकृति की शोभा से बढ़के कोई शोभा न होता रब तेरे जैसा यार जहां में कोई ना होता ।। ————————————————– हरिश्चन्द्र की शोभा, तु सत्य बनके आया राम बनके तुमने, सुग्रीव को उबारा सुदामा की […]
मेरा कुछ भी नहीं है, मुझमें राम सब-कुछ तेरा ही तेरा है राम बस देना साथ हमें सदा राम हम हैं तुम्हारे, तुम हो हमारे राम ।।1।। ——————————————— एक तेरा ही रूप फैला है कण-कण […]
कुछ दावों में, वादों में, कुछ बहकावों में छले गए, भोले-भाले कुछ किसान झूठे भावों में चले गए.. खेतों में पगडण्डी की जो राह बनाया करते थे, आज भटक कर वो खुद ही ऐसे राहों […]
किसान है,भारत की शान है खेत – खलियान की है,जान मेहनत में है ,उनकी अलग पहचान देश को विकसित बनाने में है उनका सबसे बड़ा योगदान देश की अभिमान भारत की है,अलग पहचान किसान है […]
अंधा ना कहो आँखों वालों, मुझे नेत्रहीन ही रहने दो। आँख नहीं ग़म का सागर है, कुछ खारा पानी बहने दो। तुम क्या समझो आँखों का न होना, एक छड़ी सहारे चलता हूं। अपने ही […]
फूलों के बिस्तर पर जन्मा पला बढ़ा उल्लासों में । जिसको प्रचुर मिली सुविधाएं डूबा भोग विलासों में । है भूमिका भाग्य की लेकिन अथक परिश्रम किए बिना, कोई नहीं महान बना है अब तक […]
जिस बंदे ने तुम्हारी परोसी थाली है, पर मजबूरन आज उसी की थाली खाली है। और समझो धूप बरसात गर्मी -ठण्डी उन दताओ की वरना राजनीति के चेहरे पर कालिख है। कल जो बादल वर्षा […]
उसके खून से धरती माँ की चुनर लाल है, उस अन्नदाता से ही माँ के लाल लाल है। देखो आज माँ के कुछ लालो ने क्या हाल किया, कुछ लोगो से ही मेरा अन्नदाता आज […]
जो बादल सदैव ही निर्मल वर्षा करते थे निज तपकर अग्नि में तुमको ठण्डक देते थे वह आज गरजकर तुम्हें जगाने आये हैं ओ राजनीति के काले चेहरों ! ध्यान धरो, हम ‘हल की ताकत’ […]
मैं किसान हूं , हां मैं किसान हूं | धरती मां की मैं ही आन बान शान हूं| मैं किसान हूं|| धरती मां को चीर के तुम्हें खिलाया है, अपना पसीना पौछकर तुम्हें जिलाया है, […]
मैं किसान हूं समझता हूं मैं अन्न की कीमत क्योंकि वो मैं ही हूं जो सींचता हूं फसल को अपने खून और पसीने से मरता हूं हर रोज अपने खेत की फ़सल को जिंदा रखने […]
जिंदगी थी बस चंद लम्हों की दास्ता रह गयी अधूरी फिर भी अनकही, अनसुनी
हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ। मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ। सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब। अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब। कहे लेखनी आज, व्यथित […]
26 जनवरी, 15 अगस्त, देश भक्ति जगाओ, झण्डे फहराओ, बलिदान पर “उनके”, तुम इतराओ, फिर भूल जाओ भूल जाओ।। नारी दिवस, बालिका दिवस, कविता सुनाओ, मंच सजाओ, मौका मिले तो दानव बन जाओ, फिर भूल […]
आज फ़िर चाँद परेशान है, प्रदूषण में धुंधली हुई चाँदनी तारे भी दिखते नहीं ठीक से, आज आसमान क्यों वीरान है। आज फिर चाँद परेशान है। प्रदूषण का असर, चाँदनी पर हुआ चाँदनी हो रही […]
वर स्वरुप में बमबम मालतीमालया युक्तं सद्रत्नमुकुटोज्ज्वलम्। सत्कण्ठाभरणं चारुवलयाङ्गदभूषितम्।। वह्निशौचेनातुलेन त्वतिसूक्ष्मेण चारुणा। अमूल्यवस्त्रयुग्मेन विचित्रेणातिराजितम्।। चन्दनागरुकस्तूरीचारुकुङ्कुमभूषितम्। रत्नदर्पणहस्तं च कज्जलोज्ज्वललोचनम्।। . भाषा भाव मालती बड़ माल शोभित,रत्न मुकुट बड़ चमचम। कंगन बाजूवन्द मनोहर,हार गला में दमदम।। अगर […]
दुलहिन गिरिजा माता सुचारुकबरीभारां चारुपत्रकशोभिताम्। कस्तूरीबिन्दुभिस्सार्धं सिन्दूरबिन्दुशोभिताम्।। रत्नेन्द्रसारहारेण वक्षसा सुविराजिताम्। रत्नकेयूरवलयां रत्नकङ्कणमण्डिताम्।। सद्रत्नकुण्डलाभ्यां च चारुगण्डस्थलोज्ज्वलाम्। मणिरत्नप्रभामुष्टिदन्तराविराजिताम्।। मधुबिम्बाधरोष्ठां च रत्नयावकसंयुताम्। रत्नदर्पणहस्तां च क्रीडापद्मविभूषिताम्।। भाषा भाव केशपाश कुसुमित सालि पत्र रचित बड़ सुन्दर। कस्तूरी सिन्दूर के टीका,भाल […]
अन्न उपजाऊं फिर खाना खाऊं, जन्म ले लिया किसान के देश कहे अन्नदाता मुझको, बैठा हूं सड़कों पर शान से। दिल्ली के बॉर्डर पर पड़ा हूं, अपने हक की खातिर मैं खेत छोड़ बॉर्डर पर […]
भोजपूरी पारंपरिक होली गीत – गोकुला के दुआर | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | करा ना साजन तू हमके इनकार | कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर | बितले जड़वा आइल […]
पर्वतों की गोद से निकल, झरने का जल बह चला। मिलन करूं मैं धरा से, यह कह कर चला। मिलन हुआ धरा से, पर उस मिलन में, घना ताप सहकर जल बना वाष्प,बने मेघ और […]
नारी को न समझो खिलौना मनुज, वह भी एक इंसान है। जन्म देती है इंसान को, सोचो कितनी महान है। बन कर मासूम सी बिटिया, तुम्हारा घर महकाने आई है। बन कर बहन जिसने, सजाई […]
सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान, सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान। मिलता है सम्मान, उसे जो सच होता है, झूठ हमेशा झूठ, बना इज्जत खोता है। कहे लेखनी मान […]
राहों में आपके कोमल सी दूब हो, पाने का हो जुनून मन में उमंग खूब हो। आ जायें जब कभी मायूसियों के दिन कुहरे के बीच भी थोड़ी सी धूप हो। मन साफ हो दिखे […]
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