हो जाए जो तेरी मेहर तो चमक उठेगी किस्मत मेरी पड़ा तम में स्वप्न जो दीप्तिमान हो जायेगा इस गरीब की कुटिया में आशा का दीपक टिमटिमायेगा पर तू ऐसा कहाँ करेगा ! भरा है […]
हो जाए जो तेरी मेहर तो चमक उठेगी किस्मत मेरी पड़ा तम में स्वप्न जो दीप्तिमान हो जायेगा इस गरीब की कुटिया में आशा का दीपक टिमटिमायेगा पर तू ऐसा कहाँ करेगा ! भरा है […]
भार्या ********** मैं तुम्हारी भार्या हूँ संगिनी पथ की रहूंगी कष्ट ना होगा तुम्हें सारे दुःख मैं खुद सहूंगी बोलता है मन ये मेरा तुम व्यथित हो आजकल डूबते सपनें तुम्हारे तैरते हैं पलकों पर […]
सुबह सवेरे द्वार पे मेरे, एक निर्धन ने पुकारा एक बालक था गोद में उसकी, ठंड से कांप रहा बेचारा मैंने झटपट एक स्वेटर लाया और उस बालक को पहनाया करुण भाव उपजा था मन […]
रोशनी में चमकता कांच नहीं अंधेरे में जले, आप वो चिराग बनो मिटा तमस को, चमक फैलाओ भटकते हुए की पनाह बनो। बेसहारा, अनाथ हैं जो भी उन्हें सहारा दो, हो सके तो एक तिनके […]
प्रिय की प्रियतमा बनकर आनंदमय जीवन का सूत्रधार बनो अशोविता हो एक सशक्त जीवन एक ऐसा ही तुम सार बनो संलग्न कर जीवन तुम अपना करो पथिक का पूरा सपना जीवन जिसका तुम संग बीता […]
सफलता और असफलता के कयी पङाव देखे हैं हमने हार और जीत के कयी अनुभवों को जीये हैं हमने । फैसले लेने के मुकाम पर साहस दिखाने का हौसला सही निर्णय लेने की जद्दोजहद में […]
आंखों में शर्म पलकों में हया लब पर मोहब्बत की दास्तां है आपके दिल से शुरू मेरा सफर आपकी बाहों में ही खत्म मेरा रास्ता है जी ना पाएंगे हम आपके सांसो के बिना आपकी […]
मम्मी की मैं रानी बिटिया पापा कहते सयानी बिटिया धमा चौकड़ी भागम – भाग कूद – कूद कर करती बात कहती मम्मी कहो कहानी जिसमें हो राजा और रानी हाथी घोड़ा शेर भी हो और […]
जब-जब चलना सीखा हमने लोगों ने रोड़े ही लगाये खुशी के आँसू निकल ना पाए दुःख ही दुःख हमने अपनाए जाने क्या है भाग्य में मेरे जो मैं करती सबकुछ उल्टा पीर-फकीर सा मेरा जीवन […]
सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ???
बाँसुरी की तान पर राधा दीवानी हो गई मीरा दीवानी हो गई प्रज्ञा’ दीवानी हो गई छेंड़ता मुझको है नटखट नंदबाबा का दुलारा छोंड़े ना मोरी कलाई ब्रज की गोपिन का है प्यारा प्रज्ञा लिखकर […]
छलना ही सीखा जीवन भर अच्छे कर्म कहाँ कर पाए जीवित होते पौधों को हम नेह का नीर कहाँ दे पाए पीर की चादर तान के हम तो रातोंरात कवि बन गये और ना कुछ […]
बेजान हुए पत्तों-सा जीवन भूमि पर आकर बिखर गया वृक्ष की डाली रही अकेली पत्ता भी पीला पड़ गया यह सब देख के वृक्ष ने बोला- ओ डाली ! तू क्यूं इतना संताप करे रोज […]
हर तरुवर दे केवल फल, यह ज़रूरी नहीं ज़िन्दगी में किसी वृक्ष की छाया भी, सुकून बहुत देती ज़िन्दगी में जिसने झेली हो तपिश ज़िन्दगी की, वही सुकूं का सुख जानते हैं जिनकी फल पर […]
जिस प्यार पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था वो अन्दर से कमजोर है जिन वादों पे हमको बड़ा नाज था क्या पता था कि डोर उसकी कमजोर है || करूँ किसकी याद ,जो […]
छोटी-छोटी खुशियां हैं छोटे-छोटे बच्चों की, छोटी सी खुशी में वे सहज मुस्काते हैं। प्यार के जरा से बोल प्रीति कर दिल खोल, आप मुस्काओ तो सहज मुस्काते हैं । द्वेष, बैर, नफरत घृणा से […]
जल जाती हूं ज्वाला सी, जब अरमान मेरे जलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो धीरे-धीरे फलते हैं मीठे-मीठे बोल बोल कर, दुनिया वाले छलते हैं लेकिन तुम्हारी नेह-वर्षा से, वो जख्म भी ढ़लते हैं […]
तर्क हैं वितर्क हैं पक्ष के भी विपक्ष के भी देख रहा हूँ टकटकी लगाये, कुछ फायदे की बात मेरे लिए भी हो। अब पाला पड़ने लगा है छतरहित घर में मेरे तीन शेड का […]
मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है और ना जगा खुदगर्ज़ इस दुनिया की फिदरत देखो सोचा कभी बदलेंगे दुनिया पर हर घड़ी यह बदलता है अपनों से दूर किए जाता है।
इबादत है तू मेरे सांसों में समाई खो ना जाना रूठ ना जाना सह ना पाऊँगा ज़िन्दगी में जिस चीज़ को चाहा है वो दूर हो जाती है कमी शायद मुझमें ही है पता नहीं […]
ओ! कविता के सृजनकर्ता, उठा कलम व जोश जगा। घिर से गए निराशा में जो, उनकी चिंता दूर भगा। यदि लिखना तू बंद करेगा, कैसे लहर चलाएगा डगमग पग धरते तरुण को, कैसे राह दिखाएगा। […]
सुप्रभात लिखते -लिखते फिर से सबेरा हो गया । उपालम्भ आया फिर भी आखिर ऐसा क्या हो गया?
कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो, इतना किसी पर, काम पूरा ना होगा, तो जमाना हसे […]
कविता- धोखेबाज दोस्त ——————————– हजार झूठे स्वार्थी दोस्त से अच्छा, एक सच्चा परम मित्र हो, नाज किया समय पैसा बर्बाद किया, वही दोस्त आइना दिखा जाते, डूबते हुए इंसान से- किनारे होकर भी, मुंह फेर […]
बेतार का तार भी क्या अजब खेल दिखाता है किसी हेलो पर चेहरा खिलखिलाता है तो किसी हेलो पर मुरझा जाता है हर एक कॉल की अलग कहानी है किसी में घुटन भरी छटपटाहट किसी […]
गुवाहाटी शहर कर्फ्यू से ग्रस्त था। जहां तहां शोर मची थी। रास्ते पे इन्सान तो क्या जानवर तक चलने में कतराते थे। सारा शहर भयाक्रांत की आगोश में समाया हुआ था। इतने में किसी औरत […]
ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक मरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै
यह जख्म कोई नया तो नहीं फिर दर्द का अहसास इतना गहरा क्यूँ ? कयी सितम अपनों ने किये पर उफ ना आज तक हमने किये अबतलक जो बेधते लब्ज़ असर कर न सके तेरे […]
ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक भरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै।।
ज्योति जल अंधेरा मिटा दे, न घबरा हवा की बातों से कितना बुझायेगी तुझे, कब तक रुलायेगी तुझे। ध्यान न दे बस रोशनी फैला, अंधेरा मिटा, सच को दिखा। आ दिये में तेल बनकर रुई […]
उलझा हुआ कलमकार हूँ, तमाम विषयों से घिरा चयन की छटपटाहट में लय से भटका हुआ हूँ। शब्द में निःशब्द भर मौन में गुंजायमान ला अंकित करने में असफल रहा हूँ। ठिठुरते बचपन की व्यथा […]
छोटी- छोटी पंक्तियाँ हैं ये जो शायरी की मेरी, इन्हीं में तुम्हारी सब खूबसूरती है भरी। उपमान नए औऱ पुराने मिला जुला के, वर्णन जैसा भी किया सच सच किया है। देर रात चाँद आया […]
न ही मंदिर का न मस्जिद का इस दुनिया को इंतजार है गरीबों के लिए बने शिक्षा का आलय यह मेरा अपना विचार है। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
रोहन काका फोर्थ ग्रेड की नौकरी करके अपने दो बेटे प्रदीप ,प्रताप एवं बेटी प्रज्ञा को पढ़ाया लिखाया। प्रज्ञा को ग्रैजुएट करने के बाद ही हाथ पीले कर दिए। प्रदीप व प्रताप को यू पी […]
जीवन की आड़ी-सीधी रेखाएं बनती और बिगड़ती रहती हैं… देख के कर्मों की गति ये कभी हँसतीं तो कभी रुवासी रहती हैं… पथ पर अपने चलने को आतुर रहती हैं समय की गति से सौदेबाजी […]
ऐ काश! कोई तो होता जो बांहों में ले लेता कहता मुझसे दो बातें सबकुछ मेरा ले लेता मुझ बिन ना कटती रातें मुझ बिन ना सवेरा होता.. कभी रोती तो रोने ना देता सारे […]
बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
ऐ खूबसूरत बहारों की मलिका कहां से लाऊं ढूंढ कर तेरा जवाब आसमां में चमकता है जो चांद लगा है उसमें भी दाग। वीरेंद्र सेन प्रयागराज
मौत के बाद क्या है किसी ने जाना नहीं है प्रकृति को क्यों किसी ने पहचाना नहीं है आखिर मृत्यु के रहस्य को ईश्वर ने क्यों छिपाया इंसान ईश्वर के रहस्य को समझ पाया नहीं […]
जब मां की कोख में मेरी जिंदगी पल रही थी मेरे बाप की चिता भी श्मशान में जल रही थी जब हमने इस दुनिया में अपनी आंखें खोली देखी खून की होली सुनी बंदूकों की […]
जरूरी है नहीं हर फूल की खुशबू मेरी ही हो, मुझे मेरी जरूरत का मिले बाकी सभी का हो। हमेशा जिद कहाँ तक पूर्ण हो नादान मन की इस, हमेशा की जलन इसमें कभी चन्दन […]
अरी सरिता, न रुक चलते ही बन चलते ही बन। राह में सौ तरह के विघ्न हों, उनको बहा ले जा, पत्थरों को घिस पीस दे सब नुकीलापन, पकड़ ले मार्ग तू अपना न ला […]
चाँद तुम रात भर चले, चमके, न जाने कब से सिलसिला ये चला । अब तक चल रहा है, चलते ही जा रहा है। कोई जा रहा है, कोई आ रहा है, लेकिन तुम्हारा सिलसिला […]
तीन दिसम्बर अठारह सौ चौरासी का पावन दिवस मनोहर था। घर-घर मंगल गान गुंजते बजे बधाईयाँ संग सोहर था।। आसमान से टपक सितारा आया बिहार के एक गांव में। सारण उर्फ सीवान जिले के जीरादेई […]
ओज कविता- शिकार किया करते है | पीठ पीछे से वार सदा सियार किया करते है | हिन्द के जवान मुंह सदा हुंकार किया करते है | नापाक दुशमनों तुम हमे क्या आजमाओगे | सामने […]
बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम जिन्दगी में सुगंध फैलाती मनोहर धूप सी तुम। मुस्कुराहट इस तरह की नाजुक सी, ठोस के साथ में घुलती जरा सा भावुक सी। कभी आलिम कभी हो […]
हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी… अपनी इज्जत बाजारू कर घर की चलती रोटी… हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी…. बेंचकर अपने बाप का कफन […]
क्यूं इतना वैमनस्य बढ़ा है ?? दिल में बम-बारूद भरा है.. मुँह से तो बोले मीठा-मीठा मन में कितना पाप भरा है लुटा दी हमनें प्रेम की गागर फिर क्यों मन में जहर भरा है […]
बिटियारानी ! अब तो आओ कहां छुपी हो ये तो बताओ ढूंढ नहीं पाऊंगी अब तो नहीं सताओ सामने आओ लुका-छिपी अब बहुत हुई तेरी माँ बहुत थक गई कुछ तो खा लो कुछ तो […]
रोटी की लालसा में भटकते रहते हैं दर-दर की ठोकरें खाते रहते हैं रोटी की कीमत क्या होती है यह सिर्फ हम ही समझते हैं दिन भर उठाते हैं बोझा तब रात को दो निवालों […]
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