बदल रही है ज़िंदगी, बदल रही हूँ मैं..! तुम इश्क हो तुम्ही में ढल रही हूँ मैं!! नरमी तुम्हारे हाथों की ओढ़े हुए हैं धूप..! तपिश में इसकी बर्फ़ सी पिघल रही हूँ मैं!! जाना […]
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बदल रही है ज़िंदगी, बदल रही हूँ मैं..! तुम इश्क हो तुम्ही में ढल रही हूँ मैं!! नरमी तुम्हारे हाथों की ओढ़े हुए हैं धूप..! तपिश में इसकी बर्फ़ सी पिघल रही हूँ मैं!! जाना […]
देख के खेतों की हरियाली, नव-प्रभात ऊषा की लाली मन विभोर हो उठा है मेरा, मन मचले मत जा यहां से कितना सुन्दर गांव है मेरा पीली-पीली ओढ़ ओढ़नी, सरसों खड़ी मुस्काए मीठे गन्ने की […]
डटे हुए हैं सीमा में वे, रोक रहे हैं दुश्मन को, चढ़ा रहे हैं लहू- श्रमजल, मिटा रहे हैं दुश्मन को। ठंडक हो बरसात लगी हो, चाहे गर्मी की ऋतु हो, सरहद के रक्षक फौलादी, […]
वो मीठी बातें और मुलाकातें करते थे हम रात भर जो प्यार भरी बातें तुम जाने कितने तोहफे मुझे दिया करते थे, हर तोहफे में एक खत रखा करते थे.. उन खतों की बात निराली […]
तुम मुझे प्यार नहीं करते हो यही सोंचकर मैं बहुत उदास थी ! तुम आये जब घर तो कुछ आस जगी.. मैंने जल्दबाजी में बनाई थी अपने लिये जो एक कप कॉफी थोड़ी पी ली […]
उलझनें रात को उबाती हैं दिन में नहीं तन्हाई रात को तड़पाती है दिन में नहीं.. पीर महसूस करने का वक्त दिन में नहीं मिल पाता है इसीलिए कवितायें रात को लिखती हूँ दिन में […]
ओ मेरे प्रियतम कान्हा !! मुझको तेरी बेरुखी से डर लगता है, तुम्हारी आँखों से साफ पता चलता है… तुम जिस तरह मायूस निगाहों से मेरी तरफ देखते हो, अपनी लाचारी साफ बयां करते हो… […]
नि:संतान थे राजा प्रियंवद, पुत्र-प्राप्ति हेतु किया हवन प्रशाद की खीर खाकर, रानी मालिनी ने दिया एक पुत्र को जनम किन्तु पुत्र जीवित ना था राजा ले जा रहे थे पुत्र का अंतिम संस्कार करने […]
आई आई छठ पूजा है आई, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को जाए ये मनाई छठ पूजा की धूम देखो, चारों ओर है छाई बच्चों और सुहाग का, मंगल करती है छठ […]
मानवता बिलख रही है दानवता विहँस रही है है आह आवाजों में अस्मिता सिसक रही है ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है || ये शाम रंगीली ,सुबह नशीली उनकी हो रही है जहाँ […]
अगर राधा ना होती तो श्याम से प्रीत कौन करता ? अगर मीरा ना होती तो भक्ति के पद कौन गाता फिरता ? यही तो है प्रेम में हमेंशा नारियों ने अपने आपको सराबोर कर […]
हम आधुनिक होते जा रहे हमारी आस्था आज भी वही हम उपासको के लिए सूर्य परिक्रमण कर रहा पृथ्वी है स्थिर। दर्शाता रह पर्व लोक-आस्था विज्ञान पर है भारी सदियो से प्रारम्भिक रूप मे सूर्य […]
खाद्य-निरीक्षक की चलती थी, रिश्वत से रोजी-रोटी लाला ने इन्कार किया तो, धमकी आ गई मोटी-मोटी लाला जी के होटल में, खाना बनता था शुद्ध लेकिन बिन मोटी रिश्वत के, अफ़सर हो गया थोड़ा क्रुद्ध […]
कविता : सफलता ,ऊँची उड़ान जीवन है छणिक तुम्हारा भूल कभी कोई न जाना बनकर सूरज इस वसुधा का जर्रे जर्रे को चमकानां || सूरज ,चांद सितारे छुपते हम ,तुमने भी है एक दिन जाना […]
तमाशा नहीं जिन्दगी हकीकत है, जी लो जी भर के कल किसको फुर्सत है… रोज़ लड़ते हो तुम धन-दौलत के पीछे, उतना ही कमाओ जितनी जरूरत है.. यह धन-दौलत सब यहीं धरा रह जायेगा, जो […]
गलतफहमियों में जीना अच्छा लगता है….. मुझको तेरा हर एक बहाना अच्छा लगता है….. कभी तू रोये कभी तेरी बातें मुझे रुलायें मुझको तेरा इठलाना अच्छा लगता है….. कभी नजर उठाकर तू बोले मुझसे तौबा […]
तुम कितनी भोली हो बाला तेरा कितना रूप निराला मीठी-मीठी बातों से तुम मुझको रोज रिझाती हो सुबह होते ही तुम जाने कहाँ गुम हो जाती हो ! सांझ होते ही मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करने […]
इंसानियत कब इंसान की जिंदा होगी क्या तब जब हर आत्मा से निंदा होगी जागो देखो सोचो सुलग रहा है समाज कब तक बंद रखोगे अपनी आवाज बोलो जो चाहते हो, कहो जो सोचते हो […]
प्यारी-प्यारी बिटिया रानी, कहे मां कह एक कहानी राजा हो या रानी मां तेरी कविता लिखती है, कैसे कहे कहानी फ़िर भी सुन, ओ बिटिया रानी एक थी झांसी की रानी, मनु नाम था बचपन […]
आधुनिक नारी ने तोड़ दी हैं गुमनामी की जंजीरें बढ़ाई है अपनी ताकत अपनी मेहनत से पाया है बुलंदियों का आसमां कभी खैरात में नहीं मांगी उसने खुशियां नारी ने तो हमेशा से त्याग, तपस्या […]
तिरस्कृत महिला **************** तिरस्कार मनुष्य को जीवित ही मार देता है ये वह जहर है जो धीरे- धीरे असर करता है शेक्सपियर भी कह गये हैं मित्रों ! “बदला लेने और प्रेम करने में नारी […]
ढ़ल गई है सांझ देखो, धूमिल सा मंज़र हुआ चांदी की चादर ओढ़ के, हर पर्वत सो गया चांद भी ठिठुरता सा, बादलों में खो गया श्वेत-श्वेत दूधिया सी, सारी नगरी हो गई हिम की […]
तुम्हारी मौजूदगी और मेरी तड़प थक गई हूँ अब मैं एक जगह रुककर, तुम जब आते हो दिल का दर्द क्यों बढ़ जाता है? रूबरू होने का कहाँ हमको वक्त मिल पाता है आते हो […]
पगडंडियां जिंदगी के सफर में बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कभी नफरत के साए में जीना कभी प्यार का पाठ पढ़ा जाती हैं। जिंदगी की पगडंडियों पर चलते हुए उम्र के कई पड़ाव पार कर […]
गुलाबी धूप की, ओढ़ चुनरिया देखो सर्दी आई है ठंडा कोहरा आसमान में, बादल भी संग लाई है पर्वतों का सा,मौसम हो जाता चाय सुहाती है हरदम बिन शॉल और बिन स्वेटर तो, निकला सा […]
द्वार पर खड़ी हूँ भीख दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो तेरे बाल- बच्चे सलामत रहें, घर-द्वार फूले-फले, बड़ी भूंख लगी है कुछ खाने को दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो… […]
हर सुबह होती है मुस्कुराते हुए रात होते-होते आँख भर आती है जिन्दगी की उलझनों में उलझती हूँ ऐसे कि जिन्दगी की शाम हो जाती है बेबसी, आँसू, रुसवाई के सिवा कुछ नहीं है मेरे […]
भिन-भिन करती, मक्खियां आई! भी-भी करते, मच्छर लाई! गोलू बड़े ही मस्त मौला, जिन्न को झट से आवाज लगाई, मुस्कुराकर जिन गोलू से बोला, चैन से सोएं मेरे साईं, मच्छरदानी! अभी लगाई। भी -भी ,भिन-भिन, […]
भाई दूज स्पेशल:-💟💟 ******************** जब मैं छोटी थी तो तू ही था जो उंगली पकड़ता था मेरी गिरती थी तो तू संभाल लेता था हाँ, आज थोड़ी लम्बाई बढ़ गई है पर बुद्धी आज भी […]
मुसीबत के दौर में सतर्कता ही हर संकट का हल होगा । सतर्कता का लिबास पहन लो कल भविष्य तुम्हारा उज्जवल होगा । समृद्ध भारत के राह का उद्गम है, स्वच्छ, सतर्क और जोश भरे […]
देवकी-नन्दन कृष्ण कन्हैया गोकुल में विराजे हैं नन्द-यशोदा के लाडले, मोर मुकुट, कानों में कुण्डल हस्त मुरलिया साजे है कुपित होकर इन्द्र ने जब जल बहुल बरसाया था, कनिष्ठा पे कृष्ण ने, गोवर्धन गिरि उठाया […]
कविता-बुखार में मां की याद आई ——————————————- वर्ष बाद बुखार हुआ, मानों- अंतिम समय ने घेर लिया, चारों तरफ दिवाली का उत्सव था, हम लिए बुखार अपनी, कमरे में- खुद को कैद कर लिया, हमें […]
बचकर चलो रे राही! घर के बाहर मौत खड़ी संभल चलाओ गाड़ी घर के बाहर मौत खड़ी…. हेलमेट लगाकर बाहर निकलो सीटबेल्ट भी बांध के निकलो चौपहिया या हो दो पहिया आँखें चौकन्नी करके निकलो […]
एक माटी का दीपक सिखा गया खुलकर हँसना, हँसकर जीना, जीकर अपना सपना पूरा करना एक माटी का दीपक सिखा गया….. बोला प्रज्ञा ! मत रो पगली आज तो है दीवाली अपनी मुझे जला तू […]
मुझको तो बस तन्हाई में ही जीना है सिसक-सिसक कर रहना है घुट-घुट आँसू पीना है कोई ना समझा मेरी पीर को तो तुम क्या समझोगे ! नहीं किया कभी प्यार किसी ने तो तुम […]
दीवाली के दीप सजाने, जब आई मैं घर के द्वार तो मैंने देखा सड़क के उस पार, एक कुटिया में दो दीए टिमटिमा रहे थे रौनक भी कुछ ख़ास ना थी, एक बच्ची कुछ दूर […]
खूब दीपक जल रहें हैं जगमगाहट सब तरफ है, खिल रही खुशियाँ अनेकों, आज रौनक ही अलग है। धन-धान्य हो भरपूर सबकी कामनाएं गूंजती हैं, आज हर घर की उमंगें लक्ष्मी मां पूजती हैं। लोक […]
दीवाली के दीप जले, हर-घर में ख़ुशहाली हो अपनों का प्यार मिले, ऐसी मंगल दीवाली हो जगमग-जगमग दीपों की माला चारों ओर करे उजाला, खुशियों की मुख पर लाली हो नीरोग रहें सभी जन, ऐसी […]
दीप ऐसा जलाओ ************************ *********************** दीप ऐसा जलाओ ऐ दिलबर हर तरफ रौशनी -रौशनी हो। न अमावस की हो रात काली हर निशा चांदनी -चांदनी हो।। कोई जलाए दीप कंचन का और जलाए कोई चांदी […]
नभ से सुर सब देख रहे थे, धरा पे कितने दीप जले “जय श्री राम”, के उद्घोष से, गूंजी अयोध्या, सरयू के तीरे लाखों की संख्या दीपों की, कौन कहे निशा अमावस की जगमग-जगमग हुई […]
नम हैं लोचन तिमिर के चारों तरफ फैला उजाला चीरता तम को चला कौमुदी से भरा प्याला रात बैठी गगन में देख अचरज चकित थी आज धरती गगन से भी मनमोहक थी, स्वच्छ थी. आसमां […]
सुबह होने में अभी कुछ रात बाकी है सो जाने दो मुझको जरा कुछ रात बाकी है…. मुझको टूटकर बिखरने में लगेगा कुछ और वक्त ! क्योंकि मुझमें अभी कुछ आस बाकी है…. वो मुझसे […]
श्रीराम भजन – प्रभु श्रीराम आएंगे| जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे| काट बनवास संग सीता आज भगवान आएंगे | किया बद्ध दैत्यो का मानव उद्धार किया | खाकर जूठा बैर सबरी […]
मै नन्हा सा दीपक माटी का घी संग बाती जब दहकूं खिलखिला कर हसूं चांद के जैसे इतराऊं तम को गटागट पी जाऊँ शांत नदिया सा जगमगाऊं आखिरी सांस तक सपने सींचू…… तु भी तो […]
सगरों साल बहानेबाजी आय नञ चलत सजना। धनतेरस में चांदी नाही चाही सोनक गहना।। पैरक पायल नहियें लेबय लेबय हाथक कंगना। धनतेरस में चांदी नाही चाही सोनक गहना।। नञ औंठी न लेबय नथिया कर्णफूल नञ […]
आई शुभ दीवाली देखो आई शुभ दीवाली टिमटिम करते देखो दीपक आई शुभ दीवाली धनतेरस को खूब खरीदा हमनें सोना-चाँदी सज-धज देखो लक्ष्मी माँ आई आई शुभ दीवाली नर्कचतुर्दशी को हमने झाड़ा घर का कोना-कोना […]
दीपों की जगमग है दिवाली दीपों का श्रृंगार दिवाली है माटी के दीप दिवाली मन में खुशियाँ लाती दिवाली || रंगोली के रंग दिवाली लक्ष्मी संग गणपति का आगमन दिवाली स्नेह समर्पण प्यार भरी मिठास […]
चाइनीज झालर नहीं दीये जलाओ किसी गरीब के घर रोशनी करके दीपावली मनाओ झुग्गी, झोपड़ी वालों के भी अरमान होते हैं किसी एक के घर में प्रकाश तुम फैलाओ यूं तो अरबों की बारूद में […]
मिठाई की दुकान से कुछ दूर, एक निर्धन बालक को मैंने कुछ सिक्के गिनते देख लिया हां, मैंने उस बालक की आंखों में, एक सपना पलते देख लिया चाह उसे भी होती होगी, नए वस्त्र […]
दीवाली की धूम मची है, रौनक है बाजारों में लेकिन तुम भूल ना जाना, सुन्दर-सुन्दर दिए बनाए अपने देश के कुम्हारों ने दिए मोल ले कर उनसे तुम, उनका भी पर्व मनवा देना महीनों मेहनत […]
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